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अखाड़ा परिषद के प्रमुख महंत श्री नरेंद्र गिरी की संदिग्ध हालत में मौत.. फांसी के फंदे पर लटकते मिला शव

इलाहाबाद/प्रयागराज (प्रेस की ताकत ब्यूरो) : कई दशकों से सनातन की भगवा पताका को दुनिया भर में फहरा रहे अखाड़ा परिषद के प्रमुख नरेंद्र गिरी की मौत हो गई है. महंत नरेंद्र गिरी की मौत संदिग्ध हालत में हुई है तथा वह फांसी के फंदे पर लटकते हुए पाए गए हैं. महंत नरेंद्र गिरी की मौत के बाद न सिर्फ संत समाज बल्कि पूरा देश सन्न है. किसी को भी इस बात का विश्वास नहीं हो रहा कि अखाड़ा परिषद के प्रमुख महंत नरेंद्र गिरी अब उनके बीच नहीं रहे.
अखाड़ा परिषद के प्रमुख नरेंद्र गिरी जी लेटे हुए हनुमान मंदिर के महंत थे तथा अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष थे. आज शाम उस समय हड़कंप मच गया जब ये ख़बर सामने आई कि महंत नरेंद्र गिरी का शव फांसी के फंदे पर लटकते हुए पाया गया है.
जानकारी मिलते ही सभी आलाधिकारी मौके पर पहुंचे तथा पार्थिव शरीर को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया. अखाड़ा परिषद के प्रमुख महंत नरेंद्र गिरी ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है या फिर हत्या कर उन्हें लटकाया गया है, ये पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है. सोशल मीडिया पर लोग तमाम तरह की आशंकाएं जता रहे हैं तथा अखाड़ा परिषद के प्रमुख महंत नरेंद्र गिरी की मौत की पीछे कोई बड़ी साजिश हैं. हालांकि सच तो जांच के बाद ही सामने आएगा लेकिन महंत नरेंद्र गिरी के निधन से देश सन्न है.
यह प्रयागराज का बाघंबरी मठ था जहां उनका शव पंखे से लटका मिला है। पुलिस ने बताया था कि कमरा अंदर से बंद था। फोन से उनके एक शिष्य ने सूचना दी, इसके बाद पुलिस टीम पहुंची। उनके कमरे से सुसाइड नोट भी मिला है। इसमें एक शिष्य आनंद गिरि के बारे में काफी चर्चा है। नरेंद्र गिरी ने लिखा है कि उससे परेशान थे।
आनंद गिरि को अखाड़ा परिषद तथा मठ बाघंबरी गद्दी के पदाधिकारी के पद से निष्कासित कर दिया गया था। तब दोनों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप भी किए थे। तमाम साधु संत ने महंत नरेंद्र गिरि का समर्थन किया था। नरेंद्र गिरि ने कहा था कि आनंद गिरि माफी मांगे तब उनके बारे में कुछ सोचा जा सकता है। बाद में आनंद गिरि ने माफी मांग ली थी। हालांकि, उनका निष्कासन वापस नहीं किया गया।
हालांकि पुलिस का कहना है कि सुसाइड नोट की फोरेंसिक जांच होगी। संदिग्ध परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन पोस्टमार्टम के बारे में विचार कर रहा है। मठ पर फोरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड को भी बुलाया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम से मौत की वजह साफ होगी। सुसाइट नोट की हैंड राइटिंग की भी जांच होगी।
अभी कुछ हफ्ते पहले ही अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के नाम से बने फर्जी अकाउंट से कई विवादित ट्वीट किए गए थे। इसे लेकर नरेंद्र गिरी ने काफी आश्चर्य जताया था और उन्होंने दारागंज थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराया था।
महंत नरेंद्र गिरी की मौत की खबर फैलने पर शहर भर से उनके भक्त मठ पर जुट गए। पुलिस को भीड़ को संभालने के लिए मशक्कत करनी पड़ी।
महंत नरेंद्र गिरि पिछले करीब दो दशक से साधु संतों के बीच अहम स्थान रखते थे। प्रयागराज आगमन पर बडे़ नेता हों या फिर आला पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी, वे महंत से आशीर्वाद लेने और लेटे हनुमान जी का दर्शन करने जरूर जाते रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद सहित अन्य मंत्री और सांसद तथा विधायक मंदिर और बांघबरी मठ पहुंचते रहे हैं।
पिछले दिनों डीजीपी मुकुल गोयल भी मंदिर में दर्शन पूजन करने गए थे। कल यानी रविवार को भी डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने मंदिर जाकर महंत से आशीर्वाद लिया था। बताया जा रहा है कि वे लगातार तनाव में थे।
नरेंद्र गिरी के निधन की खबर आते ही संत समाज के साथ ही राजनीतिक दलों में भी शोक की लहर है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने शोक जताते हुए लिखा कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पूज्य संत महंत नरेंद्र गिरी जी महाराज के देवलोकगमन की दुःखद सूचना मिली। सनातन धर्म के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले पूज्य स्वामीजी द्वारा समाज के कल्याण में दिए योगदान को सदैव याद किया जाएगा। ईश्वर उनकी आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट कर शोक जताया और लिखा कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पूज्य नरेंद्र गिरी जी का निधन, अपूरणीय क्षति! ईश्वर पुण्य आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान व उनके अनुयायियों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें। भावभीनी श्रद्धांजलि।

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