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इलाहाबाद यूनीवर्सिटी का स्थापना दिवस आज

लखनऊ (विशाल वर्मा) – देशके सबसे पुराने आधुनिक विश्वविद्यालयों में चौथा स्थान रखने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय का आज स्थापना दिवस है। पहले सन् 1876 में उत्तर-पश्चिम प्रान्त के लेफ्टीनेंट गवर्नर सर विलियम म्योर, जिन्होंने इलाहाबाद में एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय के प्रारम्भ किये जाने की सिफारिश की, के नाम पर म्योर सेन्ट्रल काॅलेज की स्थापना हुई थी। बाद में 23 सितम्बर, 1887 में भारतीय संसद के एक एक्ट के द्वारा इलाहाबाद यूनीवर्सिटी की स्थापना हुई। इस विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय महत्त्व की संस्था का दर्जा प्राप्त है। इसे एक समय पर पूरब का आॅक्सफोर्ड एवं आईएएस की फैक्ट्री भी कहा जाता था। इस विश्वविद्यालय से निकले छात्रों ने देश के प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री के साथ धर्म, संस्कृति, शिक्षा, शासन व प्रशासन समेत अनेक क्षेत्रों में शीर्षस्थ पदों पर आसीन होकर विश्वविद्यालय का नाम उज्ज्वल किया। देश के मुख्य न्यायमूर्ति रहे जे.एस. वर्मा व प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रोफेसर जे.के. मेहता इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के अध्यक्ष रह चुके हैं। कुछ दुर्भाग्यपूर्ण कारणों से आज इस विश्वविद्यालय के छात्र पिछले तीन वर्षों से छात्रसंघ की बहाली के लिए संघर्षरत् हैं। 135 वर्ष पुराने इस विश्वविद्यालय का इतिहास बहुत ही गौरवशाली रहा है। कुछ समय के लिए अपना वह प्रभाव खो देने के बाद आज पुनः विश्वविद्यालय की कुलपति प्रों0 संगीता श्रीवास्तव विश्वविद्यालय को वही गरिमा उपलब्ध करवाने के लिए अथक रूप से प्रयासरत् हैं। कुलपति प्रो0 संगीता श्रीवास्तव के प्रयासों के बाद आज विश्वविद्यालय के सभी विभागों में विश्वस्तरीय शिक्षक हैं, बीएचयू, आईआईटी, जेएनयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के लगभग 250 शिक्षकों की नियुक्ति, स्मार्ट कक्षाओं, प्रयोगशालाओं एवं शोध के लिए प्रोत्साहक इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रबंधन के कई कदम यह संकेत दे रहे हैं कि विश्वविद्यालय पुनः अपने गरिमामय इतिहास को दोहराने की राह पर चल पड़ा है।

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