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सेवा न करने पर माता ने बेटे के नाम की गई 20 मरले की कोठी वापस मांगी

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सेवा न करने पर माता ने बेटे के नाम की गई 20 मरले की कोठी वापस मांगी
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सेवा न करने वाले बेटे के नाम पर की 20 मरले कोठी की रजिस्ट्री को उसकी माता ने एस.डी.एम. कोर्ट से कैंसिल करवाया है। एस.डी.एम.-1 राजीव वर्मा के पास 188, न्यू जवाहर नगर की रहने वाली आशा रानी ने सीनियर सिटीजन वैल्फेयर एंड मैंटेनैंस एक्ट, 2007 के अंतर्गत एक केस किया था जिसका फैसला सुनाते हुए एस.डी.एम.-1 ने उनके बेटे के नाम पर किए गए तबदील मलकीयतनामा (ट्रांसफर डीड) को कैंसिल करने का आदेश सुनाया है।

जानकारी के अनुसार आशा रानी के दो बेटे हैं संजय धवन और संजीव धवन। संजीव धवन अपनी माता के साथ रहता है, जबकि दूसरा बेटा दिल्ली में रहता है। आशा रानी ने कहा कि उनकी न्यू जवाहर नगर में 60 मरले की कोठी है, जिसमें से 20 मरले पिछले साल मार्च महीने में अपने एक बेटे के नाम ट्रांसफर कर दी थी। ट्रांसफर डीड संजय धवन के नाम पर करवाई थी जो दिल्ली में रहता है। उनका कहना है कि उसका बेटा उसकी सेवा नहीं करता, इसलिए जो प्रापर्टी उसके नाम पर करवाई गई थी, उसे कैंसिल करके वापस दिलाया जाए।

आशा रानी ने कहा कि वह आतंकवाद प्रभावित परिवार से संबंध रखती हैं और रैड कार्ड होल्डर है। सरकार की तरफ से उसे 5000 रुपए महीना पैंशन मिलती है, जिससे उसका गुजारा होता है। बच्चों की तरफ से कोई सहायता नहीं। आशा रानी ने बच्चों से हर महीने खर्चा दिलाने की मांग भी रखी थी। एस.डी.एम.-1 ने संजीव धवन को नोटिस जारी किया था जिसकी तरफ से वकील नीरज कौशिक पेश हुए और कहा था कि वह इस केस में पार्टी ही नहीं है, इसलिए उन्हें न बुलाया जाए।

तत्पश्चात एस.डी.एम.-1 ने ट्रांसफर डीड को कैंसिल करनेे का आदेश जारी किया। गौर करने लायक है कि सीनियर सिटीकान वैल्फेयर एंड मैंटेनैंस एक्ट, 2007 के अंतर्गत अपने बच्चों से परेशान माता-पिता के लिए 6 से 10 हजार रुपए प्रति माह खर्च लगाने की पावर एस.डी.एम. के पास है। अगर किसी बुजुर्ग ने अपने घर की तबदील मलकीयतनामा (ट्रांसफर डीड) चाहे रजिस्टर्ड हो या अन-रजिस्टर्ड, उसे किसी भी समय कैंसिल करवाने के लिए एसडीएम के पास आवेदन दे सकता है। एस.डी.एम. के पास ट्रांसफर डीड को कैंसिल करने की पावर है, अगर कोई बुजुर्ग अपने बच्चों से घर खाली करवाना चाहता है, तो उसकी पावर संबंधित जिले के डी.सी. के पास है।

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