• Login
Saturday, July 11, 2026
No Result
View All Result
Press Ki Taquat
  • HOME
  • BREAKING
  • PUNJAB
  • HARYANA
  • INDIA
  • WORLD
  • SPORTS
  • ENTERTAINMENT
  • EDUCATION
  • E-PAPER
  • CONTACT US
  • HOME
  • BREAKING
  • PUNJAB
  • HARYANA
  • INDIA
  • WORLD
  • SPORTS
  • ENTERTAINMENT
  • EDUCATION
  • E-PAPER
  • CONTACT US
No Result
View All Result
Press Ki Taquat
No Result
View All Result
Home INDIA

32 के मुकाबले 55 विधायकों का समर्थन हासिल कर हरियाणा में बनी रहेगी खट्टर सरकार

Subash Bharti by Subash Bharti
in INDIA
0
32 के मुकाबले 55 विधायकों का समर्थन हासिल कर हरियाणा में बनी रहेगी खट्टर सरकार
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
  • Facebook
  • Twitter
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Facebook Messenger
  • Copy Link

चंडीगढ़, (सुभाष भारती): हरियाणा विधानसभा में मनोहर लाल खट्टर सरकार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव गिर गया है। सदन में वोटिंग के दौरान 55 विधायक भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार के पक्ष में रहे जबकि 32 विधायकों ने सरकार के खिलाफ वोट दिया, इससे साफ हो गया कि भाजपा-जजपा गठबंधन सत्ता में बना रहेगा।
विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दल कांग्रेस ने मनोहर सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन में किसानों की मौत के मसले से भाषण शुरू किया। उन्होंने प्रस्ताव पेश करने के साथ ही सीक्रेट वोटिंग करवाने की मांग भी की।
खट्टर बोले- कांग्रेस का किसी पर भी अविश्वास हो जाता है
विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव का जवाब देते हुए सीएम खट्टर ने कहा कि कांग्रेस को कभी ईवीएम पर अविश्वास हो जाता है। कभी देश की सेना पर अविश्वास हो जाता है। अब सत्ता पर भी अविश्वास इतना बढ़ गया है। आलोचना करना अच्छे विपक्ष का काम है। मैं कहता हूं, आप हर छ: महीने में अविश्वास प्रस्ताव लेकर आएं, इससे हमें ताकत मिलेगी। भले ही विरोध है, लेकिन अच्छे काम की तारीफ भी होनी चाहिए।

विधानसभा में दिनभर की कार्यवाही के प्रमुख बिंदु
* पलवल के पृथला के निर्दलीय विधायक नयनपाल रावत ने कहा कि पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब की अपनी ही कांग्रेस सरकार को हरियाणा की कृषि नीतियां अपनाने की नसीहत दे रहे हैं, लेकिन यहां उसी पार्टी के नेता भूपेंद्र हुड्डा उन्हीं नीतियों का विरोध कर रहे हैं। नकली मुख्यमंत्री रहे हैं वह। असली मुख्यमंत्री तो मनोहर लाल हैं।
* भाजपा के विधायक असीम गोयल ने अपने भाषण में कहा कि जो लोग नारे लगाते हैं, भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशा अल्लाह-इंशा अल्लाह… कांग्रेस उनसे मिली हुई है। जब वह यहां नहीं रुके और देशद्रोही शब्द का इस्तेमाल किया तो इस पर कांग्रेस विधायक हंगामे पर उतर आए। वो वेल तक पहुंच गए। उनका आरोप है कि गोयल ने किसानों को देशद्रोही कहा है, हालांकि गोयल ने ये शब्द किसानों के लिए इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने कहा, मैं किसानों को नमन करता हूंं, पर कांग्रेस के लोग गद्दार हैं।
* जेजेपी विधायक ईश्वर सिंह को भी अविश्वास प्रस्ताव पर बोलने का मौका मिला। हालांकि ईश्वर सिंह और रघुबीर कादियान के बीच नोक-झोंक हो गई। ईश्वर सिंह ने अविश्वास प्रस्ताव का विरोध किया और मिर्चपुर कांड को सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि असली किसान हम, हमसे बढिय़ा किसान कोई हो ही नहीं सकता। इस पर ईश्वर के साथ कांग्रेस विधायक शकुंतला खटक और बिशन लाल सैनी उलझ गए।
* जननायक जनता पार्टी के टोहाना से विधायक देवेंद्र बबली को बोलने का मौका नहीं दिया गया तो उन्होंने इस्तीफा देने की बात कही।
* इससे पहले अपने अविश्वास प्रस्ताव में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि 2019 में वोटिंग से पहले लोगों का विश्वास जीतने के लिए एक पार्टी (भाजपा) 75 पार का दावा कर रही थी तो दूसरी पार्टी (जेजेपी) यमुना पार करने की बात कह रही थी। वोटिंग में जनता ने दोनों को ही नकार दिया। यह अलग बात है कि किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। बाद में एक-दूसरे का गला काटने वाली पार्टियां एक-दूसरे की दोस्त बन बैठी।
उधर मुख्यमंत्री मनोहर लाल, उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला और गृह मंत्री अनिल विज ने दावा किया है कि यह प्रस्ताव ही गिरेगा, सरकार नहीं, हमें किसी भी तरह का खतरा नहीं है।

बदले-बदले से हैं जेजेपी विधायकों के तेवर
हरियाणा विधानसभा में सरकार की तरफ से 12 मार्च को अपने कार्यकाल का दूसरा बजट पेश किया जाना है। हालांकि दूसरी ओर हालात कुछ ठीक नहीं हैं। सत्ता दल की सहयोगी जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के विधायकों के तेवर भी बदले-बदले से हैं। बीते दिन पार्टी के चार विधायकों ने कृषि कानूनों पर अपने-अपने ढंग से विचार रखे। इनमें से टोहाना के विधायक देवेंद्र बबली समेत तीन के सुर बगावत वाले हैं।

किस नाराज विधायक का क्या कहना है?
जजपा विधायक राम कुमार गौतम ने मंगलवार को ही सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान तीन कृषि कानूनों को लेकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहुत अच्छा काम किया है। अगर फिर भी कानून को लेकर किसानों को कोई दिक्कत है तो तीन साल दो माह तक कानून को रोक दें। 2024 के लोकसभा चुनाव जीत हासिल करने के बाद लागू कर दें। हालांकि अविश्वास प्रस्ताव पर गौतम ने वोट देने से मना कर दिया है। उन्होंने कहा कि ये कृषि कानून खट्टर सरकार ने नहीं बनाए हैं। मैं इस वक्त खट्टर सरकार के साथ हूं।
पार्टी के बरवाला से विधायक जोगी राम सिहाग ने कहा कि हरियाणा सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर कानून बनाए। किसानों की फसल एमएसपी पर ही खरीदी जानी चाहिए। सिहाग इससे पहले भी बगावती तेवर दिखा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि किसानों की मांग बिल्कुल जायज है, मैं उनके साथ खड़ा हूं। उन्होंने कहा था कि विधायक बाद में, पहले मैं किसान हूं, जरूरत पड़ी तो इस्तीफा देने को तैयार हूं।
टोहाना के विधायक देवेंद्र बबली ने विधानसभा के बाहर मीडिया से रू-ब-रू होकर कहा कि अगर विधायक अपने इलाकों में रहे तो लोग उन्हें पीट देंगे। इन्हें लोहे के हेलमेट बनवाने पड़ेंगे, खासकर जजपा विधायकों को। अगर किसानों के मसले का हल नहीं होता तो जजपा को गठबंधन से बाहर आ जाना चाहिए। पार्टी की तरफ से जारी व्हिप के चलते मैं अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सरकार के साथ रहूंगा, लेकिन मैं उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला से मांग करता हूं कि वह गठबंधन से बाहर आ जाएं।
इससे पहले विधानसभा में ईश्वर सिंह ने सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए अपनी बात शुरू की और फिर देखते ही देखते तीखे सवाल दागने शुरू कर दिए। उन्होंने बजट में अनुसूचित जाति वर्ग के लिए कुल आवंटित राशि में से 40 फीसदी हिस्सा जारी नहीं होने पर सवाल उठाये।
अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री डॉ. बनवारी लाल के जवाब से असंतुष्ट ईश्वर सिंह लगातार वित्त मंत्री से जवाब की मांग पर अड़े रहे, जिसके बाद मुख्यमंत्री खट्टर ने कहा कि वह बजट पर चर्चा के दौरान इसका जवाब देंगे। इसके बाद बीपीएल परिवारों को प्लॉट आवंटन का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 में आखिरी बार 100 गज के प्लॉट दिए गए थे। 54 फीसदी लोगों को प्लॉट मिले, जबकि बाकी 46 फीसदी को या तो जमीन पर कब्जा ही नहीं मिला या फिर पंचायतों ने इन्हें वापस ले लिया। बीपीएल परिवारों को प्लॉट देने की योजना फिर से शुरू की जानी चाहिए।

विधानसभा में पार्टियों की स्थिति
2019 के अक्टूबर में हुए विधानसभा चुनाव में 90 में से भाजपा को 40 सीट हासिल हुई। 31 विधायकों के साथ कांग्रेस दूसरी बड़ी पार्टी बनकर उभरी। दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी के खाते में 10 सीट आई जबकि 7 पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे। एक सीट इंडियन नेशनल लोकदल को गई तो एक गोपाल कांडा की हरियाणा लोकभलाई पार्टी को।
अब कृषि कानूनों के विरोध में महम के निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू और चरखी दादरी के विधायक सोमबीर सांगवान सरकार से समर्थन वापस ले चुके हैं। ऐलनाबाद सीट से विधायक इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। साथ ही कालका के कांग्रेस विधायक प्रदीप चौधरी को तीन साल की सजा होने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई है।

Post Views: 46
  • Facebook
  • Twitter
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Facebook Messenger
  • Copy Link
Previous Post

ਵਿਜੀਲੈਂਸ ਬਿਉਰੋ ਨੇ ਨਿੱਜੀ ਹਸਪਤਾਲਾਂ ਵੱਲੋਂ ਆਯੁਸ਼ਮਾਨ ਭਾਰਤ ਯੋਜਨਾ ਹੇਠ ਬੀਮਾ ਕਲੇਮ ਲੈਣ ਵਿੱਚ ਕਰੋੜਾਂ ਰੁਪਏ ਦੀ ਘਪਲੇਬਾਜ਼ੀ ਦਾ ਕੀਤਾ ਪਰਦਾਫ਼ਾਸ਼

Next Post

ELEVEN KEY BILLS APPROVED BY HOUSE DURING BUDGET SESSION OF PUNJAB VIDHAN SABHA

Next Post
ਪੰਜਾਬ ਵਿਧਾਨ ਸਭਾ ਦੇ ਬਜਟ ਇਜਲਾਸ ਦੌਰਾਨ ਸਦਨ ਵੱਲੋਂ ਅੱਠ ਬਿੱਲ ਪਾਸ

ELEVEN KEY BILLS APPROVED BY HOUSE DURING BUDGET SESSION OF PUNJAB VIDHAN SABHA

  • HOME
  • BREAKING
  • PUNJAB
  • HARYANA
  • INDIA
  • WORLD
  • SPORTS
  • ENTERTAINMENT
  • EDUCATION
  • E-PAPER
  • CONTACT US

© 2023 presskitaquat.com - Powered by AMBIT SOLUTIONS.

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • HOME
  • BREAKING
  • PUNJAB
  • HARYANA
  • INDIA
  • WORLD
  • SPORTS
  • ENTERTAINMENT
  • EDUCATION
  • E-PAPER
  • CONTACT US

© 2023 presskitaquat.com - Powered by AMBIT SOLUTIONS.