मोगा, (सुभाष भारती): किसानों द्वारा कृषि कानूनों को रद्द करवाने के लिए केन्द्र सरकार के खिलाफ शुरू किया गया आंदोलन पिछले लंबे समय से लगातार जारी है। इस आंदोलन के तहत ही किसानों द्वारा मोगा के निकट अडानी समूह द्वारा निर्मित साइलो गोदाम का घेराव भी किया गया है जिस कारण गोदाम में अनाज की हर तरह की आवाजाही बंद हो गई है। यह साइलो गोदाम भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा अपनी भंडारण क्षमता को बढ़ाने के लिए पब्लिक प्राईवेट भागीदारी (पी.पी.पी.) के तहत बनवाया गया है। इस गोदाम में अनाज भंडारण के लिए खाद्यान्न एजेंसी को समय के हिसाब से करोड़ों रूपये अडानी समूह को अदा करने पड़ते हैं। अब जब पिछले करीब 4 महीनों से किसानों ने इस साइलो गोदाम को घेर कर इसमें होने वाली हर तरह की गतिविधि को रोक दिया है जिससे सवाल यह पैदा होता है कि इसका नुक्सान किसको हो रहा है, अडानी समूह या फिर सरकारी एजेंसी को?
जिक्रयोग्य है कि भारतीय खाद्य निगम ने पीपीपी मोड पर 2 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले स्टील साइलो का निर्माण अडानी एग्रो लॉजिस्टिक लिमिटड द्वारा जिला मोगा के गांव डगरू में करवाया गया है। यह साइलो किसानों द्वारा पैदा किए अनाज को गोदाम में लाने के लिए बेहतर सडक़ नैटवर्क के साथ-साथ यहां से अनाज को दूसरे राज्यों में भेजने के लिए रेल सुविधा के साथ जुड़ा हुआ है। अनाज को खराब होने से बचाने के लिए तुरन्त सुरक्षित जगह पर शिफ्ट करने के लिए इसकी जरूरत रहती है, जिस कारण साइलो के यार्ड में पूरा रेल हैड तैयार करवाया गया है। हर वर्ष लगभग एक लाख मीट्रिक टन गेहूं साइलो गोदाम से निकालकर दूसरी जगहों पर भेजा जाता है तथा सीजन में एक लाख मीट्रिक टन नई गेहूं साइलो गोदाम में भरी जाती है।
किसानों द्वारा साइलो गोदाम के समक्ष लगाये गये लगातार धरने के कारण इस वर्ष सिर्फ 40 हजार टन गेहूं ही साइलो गोदाम से बाहर भेजी जा सकी। धरने के कारण ही साइलो गोदाम में से अनाज को शिफ्ट करने की प्रक्रिया भी पूरी तरह ठप्प पड़ी है। यदि धरना इसी तरह जारी रहा तो साइलो गोदाम में तकरीबन 40 हजार मीट्रिक टन की जगह बची रहेगी लेकिन इस खाली जगह के लिए सरकारी एजेंसी को 10 करोड़ रूपये तक का किराया तो अडानी समूह को देना ही पड़ेगा। इसके इलावा अगामी समय दौरान मोगा क्षेत्र में एक लाख मीट्रिक टन की स्टोरेज स्पेस की कमी खलेगी, जिस कारण किसानों द्वारा पैदा की फसलों को खाद्यान्न एजेंसियों द्वारा खुले आसमान के नीचे स्टोर करना पड़ेगा। इससे अनाज के खराब होने के साथ-साथ राज्य की खरीद एजेंसियों को करोड़ों रूपये का नुक्सान झेलना पड़ेेगा। जगह की कमी का यह दबाव आने वाले धान के सीजन में भी रूकावट तो बनेगा ही और साथ ही खाद्यान्न एजेंसियों के नुक्सान में भी ओर वृद्धि करेगा।
साइलो गोदाम की सुविधा बंद होने से जहां किसानों को भी मुश्किल पेश आएगी वहीं मंडियों में किसानों की ओर भीड़ बढ़ेगी क्योंकि जो एक लाख मीट्रिक टन अनाज भंडारण साइलो गोदाम में स्टोर किया जाना था वह अब नहीं हो सकेगा, जिस कारण मंडियों में फसल की खरीद में देरी होने के साथ-साथ लिफ्टिंग में रूकावट आना स्वभाविक है।

