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आज से हर 4 पहिया गाड़ी में फास्टैग लगवाना जरूरी; कैसे लगवाएं, कहां से खरीदें और कितनी होगी इसकी वैलिडिटी? जानिए सब कुछ

Subash Bharti by Subash Bharti
in INDIA, PUNJAB
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आज से हर 4 पहिया गाड़ी में फास्टैग लगवाना जरूरी; कैसे लगवाएं, कहां से खरीदें और कितनी होगी इसकी वैलिडिटी? जानिए सब कुछ
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पटियाला, (सुभाष भारती): आज से सभी चार पहिया वाहनों व उससे अधिक पहिया वाहनों को टोल चुकाने के लिए फास्टैग लगवाना जरूरी होगा। देश के किसी भी नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा को क्रॉस करते समय इसकी जरूरत पड़ेगी। बार-बार टाले जाने के बाद आखिरकार इसे आज से लागू कर दिया गया है। फास्टैग क्या है, कैसे काम करेगा, आप इसे कैसे लगवा सकते हैं, आइये जानते हैं…
फास्टैग क्या है?
फास्टैग एक इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम है। जो एक स्टिकर के रूप में होता है। ये आपको अपनी कार या गाड़ी की विंडशील्ड पर लगाना होगा। ये फास्टैग रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टेक्नोलॉजी से काम करता है। हर फास्टैग संबंधित गाड़ी के रजिस्ट्रेशन डिटेल के साथ जुड़ा होता है। इसे लगाने के बाद आपको टोल प्लाजा पर रुककर टोल फीस के पैसे कैश के रूप में नहीं देने होंगे।

ये काम कैसे करता है?
जब आप टोल प्लाजा से गुजरेंगे तो टोल प्लाजा पर लगा फास्टैग रीडर आपके फास्टैग के बारकोड को रीड करेगा। इसके बाद टोल फीस आपके बैंक अकाउंट से कट जाएगी। इसके चालू होने के बाद टोल प्लाजा पर गाडिय़ों की लंबी-लंबी लाइने नहीं लगेंगी। ये फास्टैग अभी दो पहिया वाहनों के लिए नहीं है। आरएफआईडी को नेशनल पेमेंट्स कोऑपरेशन ऑफ इंडिया ने बनाया है।

फास्टैग कहां से खरीद सकते हैं?
देश के किसी भी टोल प्लाजा से आप फास्टैग खरीद सकते हैं। इसके अलावा एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई, कोटक बैंक की ब्रांच से भी आप इसे खरीद सकते हैं। पेटीएम, अमेजन, गूगल पे जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से भी आप इसे खरीद सकते हैं। इनमें से ज्यादातर डिस्काउंट समेत अलग-अलग तरह से ऑफर भी दे रहे हैं। फास्टैग खरीदते समय आपके पास आईडी प्रूफ और गाड़ी का रजिस्ट्रेशन डॉक्यूमेंट होना जरूरी है।

माई फास्टैग ऐप से जान सकते हैं अपने फास्टैग का स्टेटस
11 फरवरी को सडक़ परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में बताया कि कई लोगों के फास्टैग की वैलिडिटी खत्म हो जाने के कारण फास्टैग लेन में गाडिय़ों की लाइन लग जाती है। कभी-कभी बिना फास्टैग वाली गाडिय़ों के फास्टैग लेन में आ जाने से भी गाडिय़ों की लाइन लग जाती है। अगर आपकी गाड़ी में फास्टैग लगा है, तो आप उससे जुड़ी हर जानकारी माई फास्टैग नाम के पीआई ऐप पर देख सकते हैं।
इसे नेशनल हाईवे मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड ने तैयार किया है। ये ऐप आपकी गाड़ी के फास्टैग का स्टेटस भी बताता है। इसके साथ ही आप अपने फास्टैग अकाउंट को इस ऐप से लिंक करके पेमेंट भी कर सकते हैं। आप चाहें तो अपने बैंक अकाउंट को इस ऐप से लिंक कर सकते हैं। इससे जब भी आप किसी टोल प्लाजा से गुजरेंगे तो टोल टैक्स आपके अकाउंट से कट जाएगा।

फास्टैग कितने का मिलेगा और कितने समय के लिए वैलिड होगा?
फास्टैग की कीमत दो चीजों से तय होती है। पहला आपकी गाड़ी कौन सी है और दूसरा आप इसे कहां से खरीद रहे हैं। बैंकों के ऑफर के हिसाब से भी इसकी कीमत में कुछ अंतर मिलेगा। आप जिस बैंक से फास्टैग लेते हैं, वो इश्यू फी और सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में कितना पैसा चार्ज करता है, उससे भी इसकी कीमत में अंतर आता है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि इसकी वन टाइम फीस 200 रुपए है। रि-ईश्यू करने की फीस 100 रुपए और रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट 200 रुपए है। एक बार खरीदा गया फास्टैग स्टिकर पांच साल के लिए वैलिड होगा। स्क्चढ्ढ जैसे बैंक अनलिमिटेड वैलिडिटी का फास्टैग ऑफर कर रहे हैं। जैसे- अगर आप पेटीएम से कार के लिए फास्टैग खरीदते हैं तो आपको इसके लिए 500 रुपए खर्च करने होंगे।

बैंक से फास्टैग लेना हो तो ये डॉक्यूमेंट लेकर जाएं
बैंक से फास्टैग लेने के लिए आपको केवाईसी डॉक्यूमेंट, गाड़ी की आरसी, पासपोर्ट साइज फोटो, पैन कार्ड, एड्रेस और आईडी प्रूफ की जरूरत होगी। आप चाहें तो अपना लाइसेंस, आईडी और एड्रेस प्रूफ के रूप में जमा कर सकते हैं। अगर आप अपने बैंक से फास्टैग लेते हैं, यानी जिस बैंक में आपका अकाउंट है तो वहां आपको सिर्फ आरसी ले जाने की जरूरत होगी।

देश में ढाई करोड़ फास्टैग यूजर
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने 2019 में फास्टैग से टोल लेने की शुरुआत की थी। जनवरी 2021 तक देशभर में 2.49 करोड़ से ज्यादा फास्टैग यूजर थे। देश के कुल टोल कलेक्शन में फास्टैग की 80 प्रतिशत हिस्सेदारी है। जनवरी में फास्टैग के जरिए रोजाना करीब 77 करोड़ रुपए के टोल टैक्स की वसूली हुई।

100 प्रतिशत फास्टैग होने पर हर साल 12 हजार करोड़ की बचत होगी
एक स्टडी के मुताबिक टोल प्लाजा पर 100 प्रतिशत टोल कलेक्शन फास्टैग से हो तो सालाना करीब 12 हजार करोड़ रुपए की बचत होगी। नोएडा की स्टार्टअप बुल्सआई टेक्नोलॉजी ने 2019 में ये स्टडी की थी। इसमें कहा गया है कि 35 प्रतिशत पैसा तो सिर्फ पेट्रोल-डीजल की बचत का है, जो टोल प्लाजा पर इंतजार के दौरान चलने वाली गाडिय़ों से खर्च होता है। बाकी 55 प्रतिशत इसकी वजह से होने वाले समय की बचत से बचेगा। इसके अलावा टोल प्लाजा पर इंतजार के दौरान होने वाले कार्बन उत्सर्जन की वजह से जो खर्च होता है, उससे भी करीब 10 प्रतिशत पैसे की बचत होगी।

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