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‘आत्मनिर्भर भारत’ में हरियाणा ने पानीपत में 1000 एकड़ औद्योगिक भूमि पर एक ‘बल्क ड्रग्स पार्क’ स्थापित करने की पेशकश की

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चंडीगढ़ (पीतांबर शर्मा) :- प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुए हरियाणा सरकार ने भारत सरकार की वित्तपोषित सामान्य ढांचागत सुविधाओं के बल्क ड्रग्स पार्क योजना के तहत पानीपत में 1000 एकड़ विकसित औद्योगिक भूमि पर एक ‘बल्क ड्रग्स पार्क’ स्थापित करने की पेशकश की है। पानीपत में बल्क ड्रग पार्क के स्थापित होने से देश में थोक दवाओं के विनिर्माण लागत और थोक दवाओं के लिए अन्य देशों पर निर्भरता कम होगी।

इसकी जानकारी श्री मनोहर लाल ने आज यहां वर्चयूल प्लेटफार्म के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत-मेड इन इंडिया, मेड फॉर वल्र्ड की दिशा में एक कदम-सीआईआई फार्मास्कोप के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए दी। इस सत्र में 15 शीर्ष कंपनियों के लगभग 325 प्रतिनिधियों ने भारत के लिए वैश्विक फार्मास्युटिकल लीडर बनने के मार्ग प्रशस्त करने के लिए रणनीतियों पर विचार-विमर्श करने के लिए आयोजित सीआईआई फार्मास्कॉप में भाग लिया।

उन्होंने कहा कि राज्य में प्रस्तावित बल्क ड्रग्स पार्क से महज 25 किलोमीटर की दूरी पर करनाल में 225 एकड़ भूमि पर एक ‘मेडिकल डिवाइस पार्क’ स्थापित करने की भी योजना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1000 एकड़ भूमि पर पानीपत में ‘बल्क ड्रग्स पार्क’ विकसित किया जाना प्रस्तावित है, जिसका विस्तार 1700 एकड़ भूमि में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पानीपत की नई दिल्ली से निकटता एक अतिरिक्त लाभ भी है और पानीपत के केंद्रित होने से पड़ोसी राज्यों पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी मात्रा में दवाओं के निर्माण हेतू कच्ची सामग्री की आपूर्ति हो सकेगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा में 150 से अधिक फार्मेसी कॉलेज, संस्थान और विश्वविद्यालय हैं, जिनके पास बल्क ड्रग पार्क की आवश्यकता को पूरा करने के लिए कुशल मैनपावर की पर्याप्त उपलब्धता है।

यह कहते हुए कि देश में फार्मास्युटिकल उत्पादों के उत्पादन में राज्य का 45 प्रतिशत हिस्सा है, मुख्यमंत्री ने कहा कि पानीपत पार्क में किए जाने वाले उत्पादन का 50 प्रतिशत उत्तर भारत में ही इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसके परिणामस्वरूप परिवहन लागत और समय की बचत होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भावी निवेशकों को आऊटराइट सेल मॉडल और लीजहोल्ड मॉडल दोनों पर जमीन दे सकती है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि राज्य सरकार उन लोगों को नीति के अनुसार अधिकतम प्रोत्साहन और सब्सिडी प्रदान करेगी जो पार्क में अपनी इकाइयाँ स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि पानीपत में एक औद्योगिक मॉडल टाउनशिप (आईएमटी) भी विकसित किया जाना प्रस्तावित है, जिसमें सामान्य गोदामों सहित फार्मास्युटिकल उद्योगों के लिए आवश्यक विश्वस्तरीय बुनियादी ढाँचा शामिल होगा।

देश और राज्य की विकास गाथा में औद्योगिक क्षेत्र के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि उद्योग न केवल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में मदद करते हैं बल्कि युवाओं को रोजगार के अवसर भी प्रदान करते हैं। पानीपत में इस पार्क की स्थापना के साथ, हरियाणा न केवल देश में दवाओं की मांग को पूरा करने में सक्षम होगा, बल्कि अन्य देशों को भी निर्यात करेगा, जिससे इस क्षेत्र में भारत दुनिया में एक अग्रणी देश बनने में अग्रसर होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार द्वारा निवेशकों के लिए विभिन्न अनुकूल निर्णयों के कारण, हरियाणा न केवल भारत बल्कि विदेशी निवेशकों के लिए भी एक पसंदीदा स्थान बन गया है। उन्होंने कहा कि राज्य को एक बेहतर परिस्थितिक लाभ भी है क्योंकि हरियाणा तीन तरफ से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से लगता है और घरेलू बाजार में लगभग 11 प्रतिशत तक पहुंच प्रदान करता है। इसके अलावा, आज 15 राष्ट्रीय राजमार्ग हरियाणा से होकर गुजरते हैं, जिनमें से चार दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र से गुजरते हैंै। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम और फरीदाबाद राज्य के प्रमुख औद्योगिक जिले हैं जिनके पास राष्ट्रीय राजमार्गों के नजदीक मजबूत विनिर्माण क्लस्टर हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली और चंडीगढ़ में अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों के अलावा, राज्य सरकार हिसार में घरेलू और कार्गो हवाई अड्डा विकसित कर रही है, जिस पर काम तेज गति से चल रहा है।

उन्होंने कहा कि हरियाणा ने देश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में जबरदस्त प्रगति की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हरियाणा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में देश में तीसरे नंबर पर है और सभी उत्तरी राज्यों में पहले स्थान पर है। इसके अलावा, हरियाणा में 2.6 लाख रुपये से अधिक की प्रति व्यक्ति सलाना आय है, जो भारत के बड़े राज्यों में सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि राज्य की जीडीपी सालाना 7.7 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है जो राष्ट्रीय विकास दर से अधिक है।

कोरोना महामारी का उल्लेख करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि हालांकि यह देश और दुनिया के लिए एक चुनौतीपूर्ण समय है लेकिन हमने इसे एक अवसर के रूप में लिया है और हम प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘‘आत्मनिर्भर भारत’’ के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में काम कर रहे हैं। देश के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के कोविड राहत पैकेज की घोषणा करने के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने फार्मास्यूटिकल्स सहित औद्योगिक क्षेत्र के विकास पर अपने हिस्से का 10 प्रतिशत खर्च करने का फैसला किया है। यद्यपि हरियाणा एक अग्रणी राज्य है और इसने पिछले कुछ वर्षों में उद्योगों और आईटी के क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है।

इससे पहले, इस अवसर पर बोलते हुए, रसायन विभाग, रसायन और उर्वरक मंत्रालय के सचिव, भारत सरकार डॉ. पी.डी. वाघेला ने कहा कि भारत ने फार्मास्युटिकल क्षेत्र में दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। कोरोना समय के दौरान उद्योगों की भूमिका की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और औद्योगिक क्षेत्र द्वारा किए गए संयुक्त प्रयासों के परिणामस्वरूप देश में आवश्यक दवाओं और अन्य चिकित्सा उपकरणों की कमी नहीं है, बल्कि पिछले कुछ महीनों के दौरान आवश्यक दवाओं के निर्यात में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि आज भारत अन्य देशों को पीपीई किट, हैंड सैनिटाइजर, दस्ताने, एन -95 मास्क और 3-प्लाई मास्क भी निर्यात कर रहा है।

चेयरमैन, सीआईआई नॉर्दन रीजनल कमेटी ऑन लाइफ साइंस एंड बायोटेक डॉ. दिनेश दुआ और को-चेयरमैन, सीआईआई नॉर्थन रीजनल कमेटी ऑन लाइफ साइंस एंड बायोटेक श्री बीआर सिकरी ने भी इस मौके पर अपनी बात रखी।

इस अवसर पर उद्योग विभाग के प्रधान सचिव श्री ए.के. सिंह, हरियाणा औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) के प्रबंध निदेशक श्री अनुराग अग्रवाल और राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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