जालंधर : पहले लोकसभा चुनाव, फिर पंजाब विधानसभा और अब स्थानीय निकाय चुनाव। जालंधर में भाजपा की लगातार यह तीसरी बड़ी हार है। लोकसभा चुनावों में जालंधर से शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार को भाजपा के विधायक जिता नहीं सके। उसके बाद विधानसभा चुनावों में जालंधर की सभी 4 सीटें भाजपा व अकाली दल हार गया। अब निकाय चुनावों में भाजपा अपने हिस्से के 51 वार्डों में से केवल 8 सीटों पर ही सिमट गई। अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश में निकाय चुनावों में जीत का पूरा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर को दिया जा रहा था लेकिन पंजाब में निकाय चुनावों में जिस तरह से भाजपा की हालत खराब हुई है, उससे मोदी लहर पर सवाल खड़ा हो गया है। इस विधानसभा हलके में कुल 17 वार्ड पड़ते हैं जिनमें से केवल एक वार्ड ही भाजपा जीत पाई। इस विधानसभा क्षेत्र में कुछ टिकट ऐसे लोगों को बांटे गए जिन पर क्षेत्र विधायक के.डी. भंडारी की सहमति नहीं थी। इनमें वार्ड नंबर 60 से मिंटा कोछड़ व वार्ड 66 से राम गोपाल गुप्ता जैसे सीट प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त इस क्षेत्र में संघ की सिफारिश पर जो टिकट दिए गए वह भी हार गए। इस क्षेत्र में कुछ नए चेहरे मैदान में उतार कर नया कुछ करने की कोशिश की गई लेकिन वह फ्लॉप हो गया। इस क्षेत्र से पार्टी के मजबूत पार्षद रहे भगवंत प्रभाकर की पत्नी रिम्पी प्रभाकर व कंवलजीत सिंह बेदी अपने गढ़ में हार गए।












