गुरसराय, झांसी(डा पुष्पेंद्र सिंह चौहान)-संत श्री आसाराम जी बापू की पावन प्रेरणा से जे.एन. महाविद्यालय में चलाए जा रहे साप्ताहिक बाल संस्कार केंद्र में आज बच्चों ने विभिन्न योगिक प्रयोगों जैसे ताड़ासन वज्रासन और भ्रामरी प्राणायाम के साथ-साथ मातृ पितृ भक्त पुंडलिक की कहानी के माध्यम से जाना कि माता-पिता की पूजा सेवा करने से देवता स्वत: ही प्रसन्न हो जाते हैं बाल संस्कार केंद्र संचालक डॉ पुष्पेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि हमें 14 फरवरी को सच्चे प्रेम दिवस के रूप में माता-पिता का पूजन करना चाहिए मातृ पितृ पूजन की परंपरा हमारी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत है जो कि गणेश जी द्वारा भगवान शंकर की पूजा से प्रारंभ होती है। वर्तमान में जबकि युवा पीढ़ी दिग्भ्रमित हो रही थी ऐसे समय में संत श्री आसाराम जी बापू ने विगत एक दशक से 14 फरवरी को मातृ पितृ पूजन दिवस मनाने का शंखनाद किया था जो कि विश्वव्यापी हो रहा है। कार्यक्रम के अंतिम चरण में प्रश्नोत्तरी एवं सत साहित्य का वितरण किया गया। कार्यक्रम में पियूष अनुराग हर्ष हिमांशु सूरज यादव सहित एक दर्जन से भी अधिक संस्कारी बालक उपस्थित रहे।













