गन्दगी व आवारा पशुओं के होते कारण सफाई असम्भव।
गन्दगी के मामले में नोबेल मिलना चाहिए अम्बाला छावनी को।
अम्बाला छावनी को सिंगापुर की तर्ज पर विकसित करने का बयान देने वालो को आइना दिखाते हुए युवा इनैलो नेता एडवोकेट दमनप्रीत सिंह ने बयान जारी करके कहाकि गठबंधन सरकार के नेताओ की कथनी व करनी में जमीन आसमान का फर्क है। अम्बाला छावनी को सिंगापुर की तर्ज पर विकसित करने व अम्बाला छावनी को चंडीगढ़ बनाने के दावे तो बहुत किए गए लेकिन हर चौक पर गन्दगी के अंबार व आवारा पशुओं के होते ऐसा असम्भव है। अम्बाला छावनी में आवारा पशुओं की भरमार है जिसके कारण अनेक हादसे हो चुके हैं। अनेक हादसों में तो कइयों की जान भी जा चुकी है। आवारा कुत्तों का आतंक बहुत जबरदस्त है। रात के समय छावनी की अधिकतर सड़कों से गुजरना बहुत मुश्किल है। एक एक सड़क पर दर्जनों कुत्ते बैठे रहते हैं जो राहगीरों को जाने ही नही देते। इनके कारण ही कुत्तों के काटने की घटनाओं में बहुत वृद्धि हुई है। अंग्रेजो के समय से डॉग अधिनियम, पिग एक्ट, काऊ एक्ट व अन्य पालतू व शिकारी जानवरो की समस्या से निपटने के लिए अधिनियम बानर हुए हैं जिन पर आज की तारीख में कोई कार्यवाही नही होती जिसके कारण दुर्घटनाए बढ़ रही है। गन्दगी के मामले में ऐतिहासिक हाथीखाना मंदिर जाने के रास्ते पर डंपिंग स्टेशन बनाने के कार्य को निंदनीय करार देते हुए उन्होंन कहाकि भगवान के दर्शन का मार्ग पवित्र होता है इसलिए उसका साफ सुथरा होना अतिआवश्यक है। गन्दगी खत्म करने के लिए करोड़ो रूपये खर्चने के बावजूद व करोड़ो रूपये के ठेके देने के बाद भी आलम यह हैं कि अनेक स्थानों पर गन्दगी ही गन्दगी नजर आती है। सरकार को सफाई व्यवस्था तो एकदम दरुस्त रखनी चाहिए ताकि बीमारी भी न फैले और शहर भी साफ रहे। इसके लिए जरूरी है कूड़े के निपटान की उचित व्यवस्था हो। आज के वैज्ञानिक युग मे कूड़ा निपटान की आधुनिक व्यवस्था उपलब्ध है जिसके तहत कूड़े से खाद तैयार होती है जिससे गन्दगी से राहत के साथ साथ आमदन का स्त्रोत तो बनता ही है, जैविक खाद से भूमि की उर्वरक क्षमता भी बढ़ती है। अम्बाला छावनी से गन्दगी खत्म करने की भी ऐसी ही व्यवस्था होनी चाहिए। वर्तमान में यदि गन्दगी के मामले में नोबेल की व्यवस्था हो तो अम्बाला छावनी को मिलने की पूरी संभावना है। मोजूदा गन्दगी की व्यवस्था को देखते हुए उच्च प्रशासनिक अधिकारियों को संज्ञान लेकर सफाई व्यवस्था दरुस्त करनी चाहिए और आवारा पशुओं से जनता को निजात दिलानी चाहिए ताकि दुर्घटनाए कम हों, सफाई भी रहे और जनता के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव भी न पड़े।












