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पटियाला 12 नवंबर (प्रेस की ताकत बयूरो) दुनिया भर के डायबिटीज के पेशेंट्स को एक जगह इकट्ठा किया जाए तो यह आंकड़ा विश्व के तीसरे देश की आबादी के बराबर होगा। इससे बड़ी बात यह है कि 50% से 70% लोगों को यह नहीं मालूम कि उन्हें डायबिटीज है।
मधुमेह रोज़ की जीवनशैली को प्रभावित करने वाली बीमारी है जो अब युवा पीढ़ी में भी देखने को मिल रहा है। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 422 मिलियन लोग मधुमेह से पीड़ित हैं, जबकि 1.5 मिलियन से अधिक लोगों की मृत्यु सीधे तौर पर मधुमेह के कारण होती है।जो लोग इस स्थिति से पीड़ित हैं, उन्हें कोरोनरी आर्टरी डिजीज, स्ट्रोक और यहां तक कि डायबिटिक नेफ्रोपैथी का खतरा होता है , बताया डॉ. गुरप्रीत सिंह डांग, सीनियर कंसलटेंट, इंटरनल मेडिसिन, मणिपाल हॉस्पिटल्स, पटियाला ने । डायबिटिक किडनी डिजीज के नाम से प्रसिद्ध, डायबिटिक नेफ्रोपैथी किडनी के काम करने की क्षमता को प्रभावित करता हैं जिसके कारण शरीर से अतिरिक्त तरल पदार्थ और गंदगी बहार नहीं निकल पाते। खून में अधिक शुगर का स्तर गुर्दे के अंदर रक्त वाहिकाओं को पतला और बंद कर देता है। पर्याप्त रक्त के बिना, किडनी क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, और एल्ब्यूमिन (एक प्रकार का प्रोटीन) इन फिल्टर से होकर गुजरता है और मूत्र में चला जाता है जहां यह नहीं होना चाहिए। इससे किडनी फेलियर हो सकता है और मरीज़ को डायलिसिस की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, मधुमेह यूरिनरी ट्रैक्ट के संक्रमण का कारण भी बन सकता है क्योंकि अधिक शुगर के स्तर की वजह से मूत्र में बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं। हालांकि, मधुमेह से पीड़ित अधिकांश लोग इस बीमारी की गंभीरता को नज़रअंदाज़ करते हैं। इसके अलावा, जीवनशैली में अचानक बदलाव के कारण, तनाव अब बहुत आम हो गया है और खान- पान के पैटर्न को प्रभावित करता हैं जिस से की ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। नियमित जांच, उचित उपचार, समय पर दवा, बेहतर खान-पान और शुरुआती जीवनशैली में बदलाव से मधुमेह के जोखिम कारकों को कम करने में बहुत बड़ा अंतर आ सकता है। शराब के सेवन से भी बचना चाहिए क्योंकि इससे न केवल ग्लूकोज का स्तर बढ़ता है या गिरता है बल्कि मधुमेह की दवा के असर को भी प्रभावित करता है। चूंकि वर्ल्ड डायबिटीज डे के लिए इस वर्ष का विषय ‘मधुमेह शिक्षा तक पहुंच’ है, इसलिए अधिक से अधिक लोगों को इस जीवन शैली की बीमारी के जोखिम और उचित प्रबंधन के बारे में जागरूक करना बहुत महत्वपूर्ण है।












