वर्ष 2024 की सर्द शुरुआत से ही हरियाणा का सियासी पारा चढ़ने लगा है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल और पूर्व सीएम तथा विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा में जुबानी जंग छिड़ी है। ताजा मामला हुड्डा के विधानसभा चुनाव के संबंध में दिये गये बयान का है। हुड्डा ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘मैं 75 साल का हो गया हूं और अभी भी सरकार से टक्कर लेने के लिए पूरी तरह से तैयार हूं।’ हालांकि हुड्डा ने किसी का नाम नहीं लिया था। बता दें कि हुड्डा लगातार कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं और जनआक्रोश रैलियां भी कर रहे हैं। सोमवार को उन्होंने करनाल में और मंगलवार को नूंह में कार्यकर्ता सम्मेलन किया।
हुड्डा के बयान के बाद मंगलवार को सीएम मनोहर लाल ने चुटकी ली। चंडीगढ़ में विधायक दल की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मनोहर लाल ने कहा, ‘भगवान उनकी आयु लंबी करे। लेकिन यह किसने कह दिया कि 75 साल की उम्र होने के बाद भी वे हमसे टक्कर लें। टक्कर कोई एक व्यक्ति नहीं, पूरा सिस्टम लेता है। कांग्रेस के सिस्टम में बहुत से लोग हैं, जो टक्कर ले सकते हैं। हुड्डा उनसे कहें कि वे टक्कर लें और स्वयं आराम करें।’ गौर हो कि भाजपा, कांग्रेस दोनों ही चुनावी तैयारी में जुटे हैं।
हुड्डा ने यह भी कहा था कि भाजपा अतिथि अध्यापकों को पक्का करने का अपना वादा पूरा करे।
गौर हो कि गेस्ट टीचर्स आंदोलनरत हैं। हुड्डा द्वारा उठाए गए इस मुद्दे के सवाल पर सीएम ने कहा, ‘कांग्रेस को तो गेस्ट टीचर्स के मामले में बोलना ही नहीं चाहिए। भाजपा ने अतिथि अध्यापकों के लिए कानून बनाकर उनकी सेवाओं को रिटायरमेंट उम्र यानी 58 साल तक के लिए सुरक्षित करने का काम किया है।’ गेस्ट टीचर्स को भी नसीहत देते हुए मनोहर लाल ने कहा, ‘अतिथि अध्यापकों को यह बिल्कुल भी नहीं भूलना चाहिए कि हमने उनकी नौकरियां पक्की की हैं। प्रदेश में एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा था, जो अतिथि अध्यापकों को 58 साल तक नौकरियां देने के सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चैलेंज कर रहा था। आगे भी किया जा सकता है। इसलिए किसी भी अतिथि अध्यापक को सावधानी से तथा पूरे धैर्य के साथ ही आगे बढ़ना चाहिए।’
‘इनकी घोषणाएं 2013 के अखबार में देख लीजिए’
मनोहर लाल ने कहा कि हुड्डा की घोषणाओं को अगर देखना है तो 2013 के अखबार उठाकर देख लें। गोहाना में बड़ी-बड़ी घोषणाएं की थीं। यहां बता दें कि उस समय सत्ता में रहते हुए कांग्रेस ने कई घोषणाएं की थीं लेकिन उन्हें पहली नवंबर, 2014 से लागू करने की बात कही थी। यानी नयी सरकार के गठन पर। अक्तूबर-2014 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पंद्रह सीटों पर सिमट गई और 47 सीटों के पूर्ण बहुमत के साथ भाजपा पहली बार सत्तासीन हुई।













