अंबाला, 14 नवंबर
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी तथा उनके साथ शहीद हुए महान गुरसिख—भाई मती दास जी, भाई सती दास जी और भाई दियाला जी—के 350वें शहादत दिवस को समर्पित पवित्र “धर्म रक्षक यात्रा” आज अपने दूसरे दिन गुरुद्वारा मंजी साहिब (अंबाला) से अगले पड़ाव के लिए रवाना हुई। यह आध्यात्मिक नगर कीर्तन गुरुद्वारा गुरु के महल, श्री आनंदपुर साहिब से, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की पवित्र छत्र–छाया में और पंच प्यारेयों की अगुवाई में प्रारंभ हुआ था।
13 नवंबर को श्री आनंदपुर साहिब से आरंभ हुई यह यात्रा लगभग 11 घंटे के निरंतर और समर्पित सफर के बाद श्री मंजी साहिब, अंबाला पहुंची, जहाँ संगतों ने अरदास, कीर्तन और दिवानों द्वारा पूरी रात श्रद्धा–भाव से हाजिरी भरी।
आज गुरुद्वारा मंजी साहिब में एक विशाल संगत को संबोधित करते हुए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान सरदार हरमीत सिंह कालका ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की 350वीं शहादत को समर्पित यह नगर कीर्तन, सिख पंथ की अटूट श्रद्धा, अद्वितीय एकता और बलिदानी परंपरा का जीवंत प्रतीक है।
कालका ने आनंदपुर साहिब से यात्रा में शामिल हुई संगतों, दिल्ली से बड़ी संख्या में पहुंची हाजिरी तथा समस्त संत समाज—निहंग सिंह जथेबंदियों, दमदमी टकसाल और सभी संप्रदायों के प्रमुखों—का विशेष धन्यवाद किया, जिनकी उपस्थिति ने इस नगर कीर्तन की शोभा को अनेक गुना बढ़ा दिया।
उन्होंने बताया कि हरियाणा के कैबिनेट मंत्री श्री अनिल विज जी ने भी अंबाला में “धर्म रक्षक यात्रा” का श्रद्धापूर्वक स्वागत किया। कालका ने श्री अनिल विज जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संगतों का निरंतर उमड़ता विशाल संगम, गुरु तेग बहादुर साहिब जी प्रति असीम श्रद्धा, भक्ति और प्रेम का दिव्य प्रमाण है।
यात्रा के दौरान संगत का अंबाला, शाहबाद मारकंडा और कुरुक्षेत्र में भी अत्यंत गर्मजोशी और उत्साह के साथ स्वागत किया गया।
कालका ने हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा किए गए प्रबंधों की हृदय से प्रशंसा की और कहा कि संगतों की सेवा और सत्कार में उनकी समर्पित भावना अत्यंत सराहनीय है।
उन्होंने जानकारी दी कि 23, 24 और 25 नवंबर को नई दिल्ली में लाल किला के समीप, गुरुद्वारा सीस गंज साहिब के सामने, श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें शहादत दिवस को समर्पित ऐतिहासिक और अद्वितीय कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
देश–विदेश से आने वाली संगतों की सुविधा के लिए एक भव्य टेंट सिटी निर्मित की जा रही है, जिससे किसी भी संगत को रहने, सुविधाओं या सेवाओं की कोई कमी महसूस न हो और सभी संगतें बिना किसी बाधा के अपनी श्रद्धा गुरु साहिब के चरणों में समर्पित कर सकें।
अंत में, सरदार हरमीत सिंह कालका ने समूचे सिख पंथ से अपील की कि वे 23 से 25 नवंबर तक होने वाले इन ऐतिहासिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में पहुँचकर गुरु साहिब की शहादत को स्मरणीय बनाएं।













