वाशिंगटन,(आईएएनएस) 15-03-23 : कोरोना संक्रमण के बाद आने वाली दिक्कतों को लेकर शोधकर्ता लगातार नए निष्कर्ष निकाल रहे हैं। हाल ही में हुई एक स्टडी में दावा किया गया है कि कोरोना की वजह से कई लोगों को ‘फेस ब्लाइंडनेस’ का भी सामना करना पड़ सकता है। कोटेक्स जर्नल में प्रकाशित स्टडी में कोरोना के बाद पहली बार ‘प्रोसोपेग्नोसिया’ यानी फेस ब्लाइंडनेस की बात सामने आई है। पहले यह ज्ञात था कि कोरोना गंध और स्वाद सहित कई न्यूरोलॉजिकल समस्याएं पैदा कर सकता है। इसके साथ ही ध्यान, याददाश्त, वाणी और भाषा से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। अमेरिका के डार्टमाउथ कॉलेज के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में एनी नाम के 28 वर्षीय अंशकालिक चित्रकार के मामले का वर्णन किया है। मार्च, 2020 में, कोविड से ठीक होने के दो महीने बाद, एनी फिर से संक्रमित हो गई। कुछ देर बाद उन्हें चेहरा पहचानने और नेविगेशन में दिक्कत महसूस हुई। डार्टमाउथ में एक मनोवैज्ञानिक और सोशल परसेप्शन लैब की सदस्य मैरी लू केसलर ने कहा कि एनी अब उन्हें पहचानने के लिए अपने परिचितों की आवाज पर भरोसा करती है। उन्होंने प्रोसोपेग्नोसिया के साथ-साथ नेविगेशनल घाटे का भी अनुभव किया। अन्य लोगों पर इसका परीक्षण करने के लिए टीम ने 54 लोगों के डेटा का परीक्षण किया। लंबे समय से कोरोना से जूझ रहे अधिकांश अभ्यर्थियों ने कहा कि उनकी धारणा क्षमता में कमी आई है। शोधकर्ताओं ने कहा कि यह कुछ ऐसा है जिसके बारे में लोगों को पता होना चाहिए।










