छिंदवाड़ा(भगवानदीन साहू)- सर्वविदित है कि विगत 29 अक्टूबर 2025 को न्यायालय द्वारा संत आशाराम बापू को 6 महीने की रेगुलर अंतरिम बेल दी गई। और पुलिस कस्टडी भी हटाई गई। राजनैतिक गलियारों से लेकर बड़े बड़े मीडिया हाउस और विशेषकर आम जनता में यह चर्चा का विषय रहा। अजय पाल लाम्बा (पूर्व DCP जोधपुर) का 2013 का वीडियो सभी जगह वायरल हुआ , जिसमें वे स्पष्ट बता रहे हैं कि 376 का केस ही नहीं है। फिर जनता के मन में सवाल उठना लाज़मी था कि जब ब्लात्कार का केस ही नहीं था, तो फिर सिर्फ मीडिया ट्रायल के आधार पर उन्हें सजा सुना देना और 12 वर्षों से जेल में रखना एक निर्दोष संत के खिलाफ घोर षड्यंत्र का स्पष्ट इशारा है। सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा चली। हिन्दू मुश्लिम सभी लोगों ने न्यायव्यवस्था की तीखी आलोचना की। यूट्यूब पर एक वीडियो बहुत वायरल हो रहा है जिसका शीर्षक है : ये पब्लिक है, सब जानती है। Asaram Bapu Case Exposed ! इसमें देश की आम जनता के विचार बताये गए हैं जो कमेंट्स के माध्यम से लोगों ने व्यक्त किये। कई यूजर्स ने माफी भी मांगी यह कहते हुए कि हमने पहले इन बाबा को गलत समझा था, अब सच पता चला तो हमें अपने में ग्लानि महसूस हो रही है। बहुत सारे मुश्लिम यूजर्स ने भी खुले मन से इस केस में उजागर सच्चाई के बारे में अपने विचार रखते हुए बापू आशारामजी के साथ हुए घोर अन्याय पर अपनी संवेदना जताई। यह पूरे देशहित में बहुत आवश्यक है कि दुबारा इस तरह किसी निर्दोष के साथ ऐसा ना हो। इसरो वैज्ञानिक लम्बी नारायण जी का केस तो सभी को याद ही है। इसके लिए न्यायव्यवस्था में त्वरित सुधार की अनिवार्य आवश्यकता है। महामंडलेश्वर नागेंद्र ब्रह्मचारी जी , स्वामी राकेशानन्द जी , देवकीनंदन जी ठाकुर , स्वामी प्रेमानंद जी महाराज जैसे कई साधु सन्तों ने निर्दोष संत श्री आशारामजी बापू के पक्ष में पहले भी अपना मत रखा है । 6 माह की अंतिरिम जमानत पर छिंदवाड़ा के खजरीं आश्रम , लिंगा आश्रम , गुरुकुल में साधकों ने खुशी जाहिर कर फटाखे फोड़े , मिठाई बांटी और होली का रंग गुलाल लगा कर त्योहार मनाया । आज इसी विषय को लेकर टिवटर पर भी ट्रेड चला ।












