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10 अगस्त को खालिस्तानी गुरपतवंत सिंह पन्नू का पुतला जलाकर देंगे अमर शहीद अरुण श्रीधर वैदय को सच्ची शर्धांजलि – हरीश सिंगला

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पटियाला, 8 अगस्त (रफतार न्यूज संवाददाता): शिव सेना बालठाकरे पंजाब के कार्यकारी प्रमुख हरीश सिंगला ने जिला पटियाला के पदाधिकारियो की बैठक ली। जिसमे फैसला किया गया कि हर साल की तरह इस साल भी अमर शहीद जर्नल अरुण श्रीधर वेधया का शहीदी दहाड़ा आर्य समाज चौक शिव सेना कार्यलय में मनाया जाएगा। जिस के लिए एक कमेटी का गठन किया गया। जिसमें लाहोरी सिंह, भरतदीप ठाकुर, अश्वनी अरोरा, शंकर भारद्वाज, राजिंदर पवार की प्रधानगी में शहीदी दिवस मनाया जाएगा।
हरीश सिंगल ने कहा के हमारे देश के शहीद हमारी युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत होते है। देश के लिए किया गया बलिदान कभी बेकार नही जाता। जर्नल वेधया ने अपनी जान देकर करोड़ो पँजाबीओ की रक्षा की। हम जर्नल वेड्या को श्रंद्धाजलि देकर देश के गद्दारों खास कर खलिस्तानीओ को खुला चलेंज करते है कि पंजाब की रक्षा करने के लिए हम हर कुर्बानी देने को तैयार बैठे है। श्रंद्धाजलि समारोह के बाद बिदेश में बैठे खालिस्तानी आतंकवादी गुरपंत पनु का पुतला भी जलाया जाएगा। इस मौके अमरजीत गोल्डी, आर के बॉबी, मोहिंदर सिंह तिवाडी, कर्मजीत सिंह, जोगिंदरपाल, रंधावा, रमनदीप हैप्पी मौजूद रहे।

जनरल अरुण कुमार श्रीधर वैद्य (अंग्रेज़ी: General Arun Kumar Shridhar Vaidya, जन्म- 27 जनवरी, 1926; हत्या- 10 अगस्त, 1986) भारतीय सेना के 13वें थल सेनाध्यक्ष थे। वर्ष 1986 में पुणे में हरजिंदर और सुखदेव ने जनरल अरुण श्रीधर वैद्य की हत्या कर दी थी। बाद में वर्ष 1992 में इन दोनों हत्यारों को फांसी की सजा दी गई।

27 जनवरी, 1926 को जन्मे जनरल अरुण श्रीधर वैद्य ने 1945 में भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त किया था।
1965 में इंडो-पाक युद्ध के दौरान खेमकरण सेक्टर में बतौर बख्तरबंद रेजिमेंट में कमांडेंट के पद पर तैनात रहे जनरल अरुण श्रीधर वैद्य ने अपनी सैन्य टुकड़ी का नेतृत्व करते हुए पाकिस्तान की सेना को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।
युद्ध में पाकिस्तानी सैनिकों को हार की ओर धकेलने के कारण उनकी निडरता और कुशल नेतृत्व क्षमता के लिए भारतीय सेना ने इन्हें ‘महावीर चक्र’ देकर सम्मानित किया था।
भारतीय सेना में असाधारण सेवा के लिए जनरल अरुण श्रीधर वैद्य को सन 1983 में प्रतिष्ठित ‘परम विशिष्ट सेवा पदक’ से सम्मानित किया गया और इसी साल उन्होंने भारतीय सेना प्रमुख या चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के रूप में पदभार संभाला।
1985 तक वह भारतीय सेना प्रमुख बने रहे।
जनरल अरुण श्रीधर वैद्य को भारतीय सेना के जांबाज सोल्जर के रूप में जाना जाता है।
वह 1 अगस्त, 1983 से 31 जनवरी, 1986 तक सेनाध्यक्ष रहे और अपने इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने भारतीय सेना को बुलंदियों की ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
अमृतसर के स्वर्ण मंदिर को आतंकियों के कब्जे से बचाने के लिए सैन्य ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ जनरल अरुण श्रीधर वैद्य के सेनाध्यक्ष रहते हुए ही चलाया गया था।

गुरपतवंत सिंह पन्नू :

किसान आंदोलन में लोगों को तोड़फोड़ के लिए उकसाने वाला आतंकवादी एवं सिख फॉर जस्टिस का संस्थापक और कानूनी सलाहकार गुरपतवंत सिंह पन्नू को लेकर एक बात तो साफ है कि उसे पकड़ना आसान नहीं है। अमेरिका या कनाडा में बैठकर वह आग उगलता रहेगा और इधर पुलिस एवं दूसरी जांच एजेंसियों के पास उसके खिलाफ केवल अधर काटने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं है।

एनआईए के अलावा पंजाब और हरियाणा में भी पन्नू के खिलाफ केस दर्ज हैं। एनआईए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को इस मामले में कहा, वह हमारे देश का नागरिक नहीं है, इसी वजह से जांच एजेंसियों के हाथ बंध जाते हैं। विभिन्न देशों के साथ बहुपक्षीय संधियां और समझौते होते हैं। अगर पन्नू दुबई या बांग्लादेश में होता तो उसकी गिरफ्तारी संभव हो सकती थी। पन्नू जहां से फोन कॉल करता है, वहां इस तरह की आजादी है। उन देशों की पुलिस को लगता है कि यह उसकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। उसके खिलाफ कार्रवाई का मतलब, मानवाधिकार का उल्लंघन होगा, ऐसा कुछ उन देशों में माना जाता है। यही वजह है कि किसान आंदोलन में गणतंत्र दिवस पर हुए उपद्रव के बाद भी वह लगातार पंजाब के युवाओं को खालिस्तान की मांग के लिए उकसा रहा है।

आईबी में लंबे समय तक रहे पूर्व आईपीएस प्रदीप भारद्वाज कहते हैं, आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू को भारत लाना बहुत मुश्किल है। वहां के कानून इस तरह की छूट नहीं देते। यह बात गौर करने लायक है कि जिसे हमारे देश में क्राइम माना जाता है तो क्या उस देश में भी वैसी ही व्यवस्था है। बहुत से देशों में ऐसा नहीं होता। मसलन, कोई ऐसा मामला जो भारत में अपराध की श्रेणी में आता है, लेकिन अमेरिका में वह अभिव्यक्ति का हिस्सा हो सकता है। भले ही किसी भी राज्य में पन्नू के खिलाफ कितने ही मामले दर्ज क्यों न हों, लेकिन कार्रवाई तो केंद्र और इसकी एजेंसियों के मार्फत ही होनी है।

जिस देश के साथ ऐसे मामलों को लेकर कोई संधि नहीं है, वहां द्विपक्षीय संबंध भी देखे जाते हैं। ऐसे मामलों में संबंध खराब होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में कूटनीतिक बातचीत का रास्ता बचता है। यह भी तभी संभव है, जब कोई भारतीय नागरिक उस देश में जाकर छिप गया हो या उसने वहां शरण ले ली हो। पन्नू के मामले में ऐसा नहीं है। वजह, वह हमारे देश का नागरिक नहीं है। आतंकी गुरपतवंत सिंह के पास विदेशी नागरिकता है। उसके खिलाफ कार्रवाई में यही सबसे बड़ी बाधा बन गई है।

आईबी के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर एवं कैबिनेट सचिवालय में सेक्रेटरी सिक्योरिटी के पद से रिटायर हुए पूर्व आईपीएस यशोवर्धन आजाद ने कहा, पन्नू के केस में यह भी देखने वाली बात है कि दूसरा देश जहां का वह नागरिक है, वहां उसकी गतिविधियों को अपराध माना जाता है या नहीं। एनआईए ने पन्नू की जमीन और दूसरी प्रॉपर्टी जब्त की है। उसमें यह आधार था कि वह देश-विरोधी गतिविधियों के लिए फंडिंग करता है। कनाडा के पीएम तक किसानों के मुद्दे पर बयान देकर आलोचना का शिकार हो चुके हैं। मौजूदा समय में उस देश के साथ भारत के संबंध बेहद अच्छे नहीं हैं। दिल्ली पुलिस ने पता लगाया था कि पाकिस्तान में बैठकर साढ़े तीन सौ ट्वीटर हैंडल्स से किसान आंदोलन में माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया गया।

एनआईए के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, जांच एजेंसी विदेश में जाकर पन्नू से पूछताछ कर सकती है, लेकिन यह इतना आसान नहीं है। इसके लिए वहां की पुलिस की मदद चाहिए होती है। उस देश के साथ हमारे संबंध कैसे हैं, ये भी देखा जाएगा। ये बहुत लंबी प्रक्रिया है। जटिल भी है और इसके लिए केंद्र सरकार की तरफ से कई तरह के प्रस्ताव दूसरे देश को भेजे जाते हैं। ऐसे में उपाय यही है कि देश में पन्नू की गतिविधियों पर सख्त निगरानी की जाए। वह कहां और किसे फोन कर रहा है, इस पर नजर रखी जाए। युवाओं को समझाया जाए कि खालिस्तान नाम का कोई आंदोलन या संगठन नहीं है। ये संगठन उन्हें गुमराह कर मुसीबत में फंसा सकता है।

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Tags: burn effigy of Khalistani Gurpatwant Singh Pannu to pay true tribute to the immortal martyr Arun Shridhar VaidyaExclusive Chat With Gurpatwant Singh PannuFact Check: Truth behind Hindustan Murdabad slogansFact-Check on Farmers Raising Khalistan Zindabad Slogansghost of Khalistan newsGurpatwant Singh Pannu Biography From PunjabInsurgency in PunjabKhalistan movementkhalistan movement today latest newskhalistan murdabad challengeKhalistan Zindabad ForceKhalistan Zindabad Force (KZF) is a militant groupLatest News & Videos Photos about Gurpatwant Singh PannuLatest News and Updates on Khalistan MovementLatest News Punjab TerroristsPro Khalistan SJF instigating Sikhs in Armypunjab militancy: Latest News & VideosReferendum 2020 today latest newsSAY NO to KhalistanSikh homeland called Khalistan via armed struggleSikh youths lured by Gurpatwant Singh Pannu
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