पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि राजस्व रिकॉर्ड को अपडेट करें ताकि अधिगृहीत भूमि की रजिस्ट्री पर अंकुश लगाया जा सके। साथ ही कोर्ट ने कहा कि राजस्व रिकॉर्ड को अपडेट कर इसे राज्य के सभी रजिस्ट्रार/उप-रजिस्ट्रार को उपलब्ध कराएं। इसके लिए भूमि के संबंध में सभी पक्षों से तुरंत रिपोर्ट मांगने के लिए कहा गया है।
जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर और जस्टिस कुलदीप तिवारी की पीठ ने मुख्य सचिव को उसके समक्ष एक याचिका में उल्लिखित अधिगृहीत भूमि के बिक्री विलेख के पंजीकरण से संबंधित पूरे प्रकरण की जांच करने का भी निर्देश दिया। साथ ही इसके लिए दोषी अधिकारियों/कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने के भी निर्देश दिये। खंडपीठ की ओर से जस्टिस तिवारी ने मुख्य सचिव को दोषी अधिकारियों की देनदारी तय करने से पहले सरकारी भूमि पर आवासीय कालोनी के विकास के लिए निजी बिल्डरों/याचिकाकर्ताओं को लाइसेंस देने की आंतरिक जांच करने का भी निर्देश दिया।
यह फैसला तब आया जब बेंच ने गुरुग्राम जिले के बादशाहपुर गांव में 2.05 एकड़ जमीन को अधिग्रहण से मुक्त करने की मांग वाली याचिका को 1 लाख रुपये के जुर्माने के साथ खारिज कर दिया। बादशाहपुर नाले के निर्माण के लिए कुछ अन्य इलाकों के साथ इस भूमि विशेष को अधिगृहीत किया गया। यह अधिग्रहण 1 मार्च, 1971 को एक अधिसूचना के बाद कर लिया गया। याचिकाकर्ताओं ने प्रासंगिक अधिग्रहण कार्यवाही की कानूनी समाप्ति के लगभग 37 साल बाद 2008 में इस भूमि विशेष को खरीदा और कालोनी के विकास के लिए 2010 में संबंधित टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से अपेक्षित लाइसेंस प्राप्त करने में कामयाब रहे।
दो माह में मांगी रिपोर्ट : हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि जांच रिपोर्ट में किसी दंडनीय अपराध के संकेत मिलते हैं, तो दोषी अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ उचित आपराधिक कार्यवाही शुरू करने पर विचार किया जाना आवश्यक है। साथ ही कोर्ट ने अपने निर्देश के अनुपालन संबंधी रिपोर्ट दो माह के भीतर प्रस्तुत करने के लिए कहा।
“याचिकाकर्ताओं ने अधिग्रहण की कार्यवाही को उलझाया। इसके लिए अधिग्रहण का एक ऐसा जाल बुना जिसे कानूनी रूप से 1970 के दशक की शुरुआत में, यानी लगभग पांच दशक पहले समाप्त कर दिया गया था। इस संबंध में तत्काल रिट याचिका ढेर सारी कमजोरियों से भरा एक गलत सलाह वाला प्रस्ताव प्रतीत होता है। यह कदम याचिकाकर्ताओं की निडरता को बढ़ाता है। इससे बेईमानी की गंध आती है। यह बिल्डर्स/कालोनाइजर्स और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के बीच अपवित्र सांठगांठ का भी खुलासा करता है।”













