September 12, 2023 ( प्रेस की ताकत )
मेजबान भारत ने अपनी अध्यक्षता का आदर्श-वाक्य ‘वसुधैव कटुम्बकम्’ या ‘एक पृथ्वी,एक परिवार, एक भविष्य’ बनाया और इसी पर आगे बढ़ा। जिसकी बदौलत जी-20 में सबकी भागीदारी पहले की अपेक्षा अधिक बन सकी। भारत ने सलाह-प्रक्रिया में दक्षिणी गोलार्ध के राष्ट्रों को भी शामिल किया और नौ देशों को आमंत्रित किया, जो अधिकतर विकासशील जगत से हैं। सम्मेलन में विश्व की विकास संबंधी समस्याओं का हल निकालने के लिए एजेंडा पर विचार हुआ। यह वैसा शिखर सम्मेलन नहीं था, जहां भारत अपने प्रतिद्वंद्वी को पछाड़ने की कोशिश में रहे बल्कि यह आयोजन वह रहा जिसमें बहु-स्तरीय तंत्र की खामियों को सुधारने की कोशिशें हुई, जीवंतता का पुनर्संचार हुआ और यह दुनिया के लोगों की जरूरतों के प्रति अधिक क्रियाशील बनने का प्रयास रहा प्रक्रिया को पटरी पर बनाए रखने और जी-20 का हश्र संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तरह गैर-प्रभावी न होने पाए, इसके लिए भारत को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी ताकि रूस और चीन के साथ पश्चिमी मुल्कों की प्रतिद्वंद्विता की छाया दूर रहे। इसलिए, जी-20 के सदस्य दक्षिणी मुल्कों के बीच गठबंधन की प्रक्रिया आरंभ हुई। इस एकता के बूते दक्षिण एशियाई मुल्कों की ताकत आखिरकार जी-20 के अकड़ू सदस्यों को माननी पड़ी।













