इटावा(डा. पुष्पेंद्र सिंह चौहान)- बरेली की एक अदालत ने रिश्तों की गरिमा को तार-तार करने वाले एक जघन्य मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपनी ही विधवा माँ के साथ दुष्कर्म करने वाले 22 वर्षीय युवक को कोर्ट ने आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
मामले की मुख्य बातें:
घटना का विवरण: यह मामला भमोरा थाना क्षेत्र का है, जहां अक्टूबर 2021 में आरोपी बेटे ने नशे की हालत में अपनी माँ के साथ हैवानियत की थी। विरोध करने पर उसने माँ का गला दबाकर जान से मारने की धमकी भी दी थी।
अदालत का फैसला: अपर सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार यादव ने इस मामले को ‘विरलतम’ मानते हुए दोषी को उम्रकैद और 22 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माने की राशि में से 20 हजार रुपये पीड़िता (माँ) को दिए जाएंगे।
DNA रिपोर्ट बनी अहम सबूत: सुनवाई के दौरान माँ और आरोपी के दोनों भाई अपने बयानों से मुकर गए थे। लेकिन वैज्ञानिक साक्ष्यों और DNA रिपोर्ट ने आरोपी के जुर्म की पुष्टि कर दी।
अदालत की टिप्पणी: न्यायाधीश ने 36 पेज के आदेश में कहा कि “इतना घोर कलयुग नहीं आया है कि कोई माँ अपने ही बेटे को दुष्कर्म के झूठे केस में फंसाए।” कोर्ट ने माना कि माँ ने मोहवश या दबाव में आकर बयान बदला है।न्याय की जीत:सरकारी वकील सुरेश बाबू साहू ने प्रभावी पैरवी की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही गवाह मुकर जाएं, लेकिन वैज्ञानिक सबूत और परिस्थितिजन्य साक्ष्य झूठ नहीं बोलते। इस फैसले ने समाज में एक कड़ा संदेश दिया है।











