मॉडल संस्कृत स्कूल में एडमिशन फीस व ट्यूशन फीस न हो।
बच्चों के भविष्य के लिए शिक्षा नीति में आधारभूत परिवर्तन जरूरी।
निजि स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए सख्त व प्रभावी कानून बनाने की वकालत करते हुए युवा इनैलो कार्यकर्ता दमनप्रीत सिंह ने कहाकि भारत को विश्वगुरु बनने के लिए शिक्षा की प्रभावी, समयानुकूल व गरीब जनता के लिए फायदेमंद नीति बननी अतिआवश्यक है। निजि स्कूलों की मनमानी की निंदा करते हुए उन्होंने कहाकि निजि स्कूल प्रतिवर्ध फीस वृद्धि करके बच्चों के अभिभवकों पर अनावश्यक बोझ तो डालते ही है साथ ही बच्चों की वर्दी व निजि पब्लिशर्स की किताबो की अनिवार्यता की नीति शिक्षा को महंगा करने के साथ साथ आम परिवारों की पहुंच से बाहर होने का कार्य करती है। कोरोनाकाल में वार्षिक शुल्क, फीस वृद्धि, इंटरनेट का खर्चा और मोबाईल व लैपटॉप के खर्च से मध्यम वर्ग के परिवारों की कमर तोड़ने का कार्य किया है। सरकार द्वारा इंग्लिश माध्यम के मॉडल संस्कृति स्कूल बनाना ठीक है लेकिन सरकारी मॉडल संस्कृत स्कूल में 500 रुपये एडमिशन फीस व 200 रुपये प्रति माह ट्यूशन फीस लेना गलत है। भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए शिक्षा का व्यवसायीकरण तो रोकना ही होगा, सस्ती, उत्तम व रोजगारपरक शिक्षा की व्यवस्था करना भी जरूरी है। उन्होंने जनता की परेशानी को देखते हुए शिक्षामंत्री से अपील की कि जनता की मांग के अनुरूप प्रभावी नीति बनाई जाए।











