इटावा(डा. पुष्पेंद्र सिंह चौहान)- ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्धनगर की पॉक्सो कोर्ट ने 68 वर्षीय बुजुर्ग को कथित दुष्कर्म के मामले में 10 साल कारावास की सजा काटने के बाद दोष मुक्त करते हुए बरी कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पूरा मामला दुर्भावना से प्रेरित था।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष मामले की बुनियादी बातों को साबित करने में असफल रहा है। यह साबित नहीं हुआ कि शिकायतकर्ता नाबालिग थी या नहीं। शिकायतकर्ता के साथ यौन उत्पीड़न हुआ था या नहीं, जो आरोप लगाए गए थे, वह भी साबित नहीं हुए।आरोपित के अधिवक्ता के मुताबिक, नोएडा की सेक्टर-20 कोतवाली में आठ अगस्त 2016 में पीड़िता के अधिवक्ता ने आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। पिता ने दो लोगों पर बेटी का अपहरण कर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। पुलिस ने विवेचना पूरी कर आठ नवंबर को पॉक्सो अधिनियम की धाराओं में चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी।पुलिस ने दोनों आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाद में एक आरोपित नाबालिक होने पर वर्ष 2023 में उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड भेज दिया गया था। जबकि मूल रूप से बिहार निवासी दूसरे आरोपित के मुकदमे की सुनवाई स्पेशल कोर्ट में चल रही थी।सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने लड़की, उसके माता-पिता, जांच अधिकारी और चिकित्सा-कानूनी जांच करने वाले डॉक्टर सहित पांच गवाहों से पूछताछ की। बचाव पक्ष ने तीन गवाह पेश किए और तर्क दिया कि कथित घटना के समय आरोपित अपनी बीमार मां की देखभाल के लिए बाहर गया था। उसके खिलाफ मामला जिस व्यक्ति ने दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था।उससे आरोपित का लंबे समय से संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। संपत्ति विवाद के कारण ही उसे झूठे आरोप में फंसाया गया। अदालत ने दोनों पक्ष को सुनने के बाद कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों की पुष्टि संबंधित कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका है। इसलिए बुजुर्ग को दुष्कर्म के आरोप से दोष मुक्त कर जेल से रिहा करने का आदेश दिया गया।











