पुलिस अधीक्षक जश्नदीप सिंह व उनकी टीम का नशा रोकने में सराहनीय कार्य।
अतिक्रमण हटाना उचित लेकिन अधिकारी बताएं अतिक्रमण हुए क्यों ?
कब्जे रातों रात नही होते, नगरपरिषद,राजनेता व माफिया के गठबंधन से होते हैं।
डेहा कॉलोनी अम्बाला छावनी में नगरपरिषद अधिकारियों व पुलिस प्रशासन की मदद से हटाए गए अतिक्रमण पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इनैलो प्रदेश प्रवक्ता ओंकार सिंह ने कहाकि अतिक्रमण कहीं भी हो उसे हटाना उचित है व यह नगरपरिषद की प्राथमिक ड्यूटी है लेकिन नगरपरिषद अधिकारी यह बताएं अतिक्रमण हुए ही क्यों ? क्या अतिक्रमण होते समय इनको पता नही लगा या इनकी जेब गर्म हो गयी थी ? अतिक्रमण व कब्जे कभी रातों रात नही होते, इसके लिए महीनों लगते हैं और यह अतिक्रमण नगरपरिषद अधिकारियों या कर्मचारियों,राजनेताओं व भूमाफिया के गठबंधन से ही होते हैं। अतिक्रमण हटाने के साथ साथ इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि अतिक्रमण किसके राज में और किस राजनीतिक व्यक्ति के समर्थन से हुए क्योकि बिना राजनीतिक सरंक्षण के अतिक्रमण सम्भव नही है। अधिकतर सरकारी स्थानों पर अतिक्रमण सत्ताधारी नेताओ के सरक्षण से होते हैं। क्रॉस रॉड नम्बर 12 के पार्क पर कब्जा सर्वविदित है लेकिन उस पर कार्यवाही क्यो नही हो रही प्रशासन को इसका संज्ञान भी लेना चाहिए। डेहा मंडी अम्बाला छावनी अवैध व खतरनाक नशे का अड्डा बन चुका था लेकिन जबसे नए पुलिस अधीक्षक जश्नदीप सिंह रंधावा, डीएसपी राम कुमार, कैंट सदर के एसएचओ नरेश शर्मा व हाउसिंग बोर्ड चौकी इंचार्ज बलकार सिंह ने कमान सम्भाली है तब से नशे के कारोबार में अभूतपूर्व नियंत्रण हुआ है। इन अधिकारियों की छवि साफ है इन्हें अपने स्टाफ पर भी नजर रखनी होगी ताकि कोई कर्मचारी नशे के सौदागरों से सांठगांठ न कर सके और यह सख्ती निरन्तर बरकरार रहनी चाहिए ताकि नशे पर अधिकतम नियंत्रण हो सके क्योकि नशा समाज को खोखला व युवाओ को अपराधी बना रहा है। नशे के कारण अनगिनत परिवार बर्बाद हो चुके हैं व अनगिनत युवाओ की मृत्यु हो चुकी है। अतिक्रमण पर नियंत्रण करने के लिए नगरपरिषद पर कर्मचारियों की पूरी फ़ौज है, 130 से अधिक कच्चे व पक्के कर्मचारी व अधिकारी नगरपरिषद में कार्यरत हैं, अगर इच्छा शक्ति और नीति व नीयत साफ हो तो अतिक्रमण हो ही नही सकता। छोटा सा तो अम्बाला छावनी है, कोई एक ईंट भी लगाए तो उसकी खबर नगरपरिषद पहुंच जाती है लेकिन अफसोस कि राजनीतिक सरंक्षण व इच्छा शक्ति के अभाव के कारण यह सम्भव नही हो पाता। रामबाग रोड, हाथीखाना मंदिर रोड व 12 क्रॉस रोड पर अतिक्रमणों की भरमार है लेकिन मिलीभगत के खेल के कारण शायद यह अतिक्रमण हटाने मुश्किल है। व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि अतिक्रमण हो ही न सके और यदि हो तो उनपर तुरंत कार्यवाही हो। पहले से हुए अतिक्रमणों की जांच होनी चाहिए कि यह कब, किस अधिकारी के कार्यकाल में व किस सत्ताधारी नेता के समय व सरंक्षण के कारण हुए ताकि दोषियों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्यवाही हो सके और जनता को सच्चाई पता लग सके।












