शिवपुरी(म०प्र०)(डा. पुष्पेंद्र सिंह चौहान) – पी.के. विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ साइंस द्वारा ‘राष्ट्रीय मयूर दिवस-2025’ के अवसर पर ‘पारिस्थितिकी तंत्र में भारत के राष्ट्रीय पक्षी को सम्मान’ विषय पर एक अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार का सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन ज़ूम वेबिनार के माध्यम से ऑनलाइन मोड में आयोजित किया गया, जिसमें देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने भाग लिया। इस अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार में विशेषज्ञों ने मोर के महत्व, उसके संरक्षण की चुनौतियों, और पारिस्थितिकी तंत्र में उसकी भूमिका पर गहन चर्चा की। प्रतिभागियों ने इस ज्ञानवर्धक सत्र में उत्साहपूर्वक भाग लिया और राष्ट्रीय पक्षी के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संकल्प भी लिया।कार्यक्रम की शुरुआत प्रतिभागियों और अतिथियों के जुड़ने के साथ हुई। अतिथियों का स्वागत पी.के. विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय से सुश्री आयुषी चौरसिया द्वारा किया गया। कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक पी० के० विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री जे० पी० शर्मा एवं संरक्षक पी.के. विश्वविद्यालय के प्रशासनिक निदेशक डॉ. जे० के० मिश्रा रहे Iडॉ. जे० के० मिश्रा ने अपने उद्बोधन में राष्ट्रीय पक्षी मोर के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया और यूनिवर्सिटी के इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि “मोर केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और वन्य जीव संरक्षण का प्रतीक है। इसके संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना पी.के. यूनिवर्सिटी का नैतिक दायित्व है।” उन्होंने मोर के सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, “हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि आने वाली पीढ़ियां भी इस गौरवशाली पक्षी को उसके प्राकृतिक परिवेश में देख सकें।”मुख्य अतिथि के रूप में पी.के. विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रो. (डॉ.) योगेश चन्द्र दुबे ने वेबिनार के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि मोर हमारी संस्कृति और जैव विविधता का अभिन्न अंग है, जिसका संरक्षण हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।मुख्य वक्ता प्रो. डॉ. अमिता कनौजिया, लखनऊ विश्वविद्यालय ने अपने वक्तव्य में ज़ोर दिया कि मोर के अवैध शिकार और उसके आवासों के अतिक्रमण को रोकने के लिए कड़े कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन ज़रूरी है। साथ ही, वक्ता डॉ. एम.सी. सत्यनारायण, प्राणी विज्ञान विभाग और वन्यजीव जीव विज्ञान, ए.वी.सी. कॉलेज (स्वायत्त), तमिलनाडु ने भी “हमारे पारिस्थितिकी तंत्र में भारत के राष्ट्रीय पक्षी का सम्मान” विषय पर विशेष व्याख्यान दिया।विशिष्ट अतिथि पी० के० विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो. मुकेश चंसोरिया ने राष्ट्रीय पक्षी के महत्व को समझाते हुए उसके प्राकृतिक आवासों को बचाए रखने पर ज़ोर दिया। साथ ही, विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. जितेंद्र मालिक ने भी वेबिनार में अपने बहुमूल्य विचार रखे।अन्तर्राष्ट्रीय संसाधन व्यक्ति (International Resource Person), डॉ. लाल चंद्र विश्वकर्मा, रोवन यूनिवर्सिटी, यू.एस.ए. ने वैश्विक परिदृश्य में पक्षी संरक्षण की रणनीतियों और मोर के पारिस्थितिकीय महत्व पर अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने वैश्विक अध्ययनों का हवाला देते हुए बताया कि, “शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन मोर के प्राकृतिक आवासों के लिए दो सबसे बड़े खतरे हैं। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए तकनीकी समाधानों के साथ-साथ सामुदायिक भागीदारी भी नितांत आवश्यक है।”वेबिनार का सफल आयोजन कार्यक्रम संयोजक डॉ. ऐमन फ़ातिमा के कुशल मार्गदर्शन में हुआ। आयोजन सचिव डॉ. आशीष विश्वकर्मा ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य मोर के प्रति सम्मान और उसके संरक्षण के उपायों पर मंथन करना था, जो पूर्णतः सफल रहा। कार्यक्रम के समन्वय में सदस्य के रूप में उपस्थित डॉ. प्रवीण कुमार, आशीष प्रताप सिंह ने सक्रिय भूमिका निभाई।वेबिनार का संचालन विज्ञान विभाग की शिक्षिका कु. आयुषी चौरसिया ने तथा आभार डीन अकादमिक डॉ० ऐमन फातमा ने व्यक्त किया Iइस अवसर पर पी० के० विश्वविद्यालय में कार्यरत समस्त शैक्षणिक/गैर शैक्षणिक स्टाफ एवं छात्र/छात्राएं उपस्थित रहे।







