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कमाल है…कश्मीरी सेब व थाई अमरुदों के बाग सुल्तानपुर में!

• भारत स्वावलंबी अभियान की कार्यशाला में किसानों और बागवानों की कामयाबी देख भौचक रह गए विशेषज्ञ

सुल्तानपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से देश में छेड़े गए भारत स्वावलंबी अभियान की जिलास्तरीय कार्यशाला में सुल्तानपुर के किसानों, बागबानों व उद्यमियों की कामयाबी देख रविवार को विशेषज्ञ भी हैरत में पड़ गए ! जी हां, वादी-ए-कश्मीर के गुणों से भरपूर स्वादिष्ट और पौष्टिक सेब हों…या हो थाईलैंड के भारी भरकम गुलाबी अमरूद, ये सब अब सुल्तानपुर के खेतों और बागों में उपजाए जा रहे हैं। निश्चय ही यहां के उत्साही युवा उद्यमी और किसानों की ये सफलता आश्चर्यचकित करने वाली है। १-२ नहीं पूरे २०० पेड़ों के फलों से लदे सेब के बाग अब सुल्तानपुरिया किसानों की कामयाबी की जीती जागती मिसाल बन चुके हैं। साथ ही वे थाईलैंड का गुलाबी अमरूद, भुसावल का केला, आम भी वे खूब उपजा रहे ही हैं। टमाटर, लोबिया, करैला आदि की  जैविक खेती में भी इन हिम्मत-ए-मरदां तरक्कीपसंद किसानों ने लाजवाब कर दिखाया है। रविवार को आयोजित की गई आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ चुके स्वावलंबी युवाओं, महिलाओं और उद्यमियों ने विशेषज्ञों से कामयाबी के तमाम गुर सीखे। उन्हें सम्मानित भी किया गया। देर शाम तक कार्यशाला चलती रही।
जैसा कि विदित है कि इन दिनों आरएसएस ने अपने अनुषांगिक संगठनों के साथ भारत को स्वावलंबी बनाने का अभियान छेड़ रखा है। इसी सिलसिले में स्वदेशी जागरण मंच व अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के सहयोग से सहकार भारती, संस्कार भारती, भारतीय मजदूर संघ, भारतीय किसान संघ, विश्व हिंदू महासंघ आदि ने जिला मुख्यालय स्थित भाजपा सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की। स्वदेशी जागरण मंच से जुड़े बीजेपी नेता डॉ.रामजी गुप्ता की अध्यक्षता व अभियान के जिला समन्वयक डॉ. जेपी सिंह के संयोजन में उद्घाटन सत्र का श्रीगणेश हुआ।
*’बाजार का रखें ख्याल, उपजा सकते हैं आप सबकुछ यहीं’*
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला प्रमुख डॉ. संतोष सिंह ‘अंश’ ने इस कार्यशाला का संचालन किया। सर्वप्रथम बागवानी विशेषज्ञ वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक फ़ाज़िल व पवन सिंह ने सत्र को संबोधित किया। दोनों विशेषज्ञों ने कहा कि, वाकई कमाल किया है इनायतपुर के सिरताज खान व मायंग के प्रदीप ने। एक ने कश्मीरी सेब तो दूसरे ने थाईलैंड के गुलाबी अमरूद उपजाना शुरू कर दिया है। इनके कार्य अनुकरणीय हैं। हमें सिर्फ मिट्टी की गुणवत्ता और विशेषज्ञों की सलाह लेते रहना चाहिये। हममें हिम्मत और लगन हो तो कुछ भी कहीं भी कर सकते हैं।अब दुनिया बदल चुकी है। बाजार का ख्याल रखें।अब सब कुछ यहीं उपजा कर आत्मनिर्भर हुआ जा सकता है। … बागबां अपने बगीचों से सेब और अमरूद, आम, चीकू आदि लेकर कार्यशाला में पहुंचे थे। इसी तरह बेहतरीन आम-केला उपजाने वाले सोहगौली के गंगा प्रसाद दुबे व सुरेश सिंह की भी खूब तारीफ की विशेषज्ञों ने। स्वयं सहायता समूहों के जरिये कामयाबी के सोपान गढ़ रहीं किरन,सविता समेत सभी को प्रशस्तिपत्र प्रदान किये गए।

*विशेषज्ञों ने दिया गुरुमंत्र*
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में उद्योग विभाग,कौशल विकास योजना व प्रोबेशन के अधिकारियों ने भी आत्मनिर्भरता के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं के विषय में लोगों को वृहद जानकारी दी। इस अवसर पर सहकार भारती के अशोक लाल श्रीवास्तव, किसान संघ के दीनदयाल प्रजापति, इंद्रदेव मिश्र, संस्कार भारती के चिंतामणि शर्मा, विश्व हिंदू महासंघ के कुंवर दिनकर प्रताप सिंह, अभियान की महिला संयोजिका उपमा शर्मा, सह समन्वयक वीरेंद्र भार्गव, ग्राहक पंचायत के विक्रम बृजेंद्र सिंह, डा.एसके सिंह, संजीव सिंह , वनवासी आश्रम के राजेश द्विवेदी, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के शिवम दुबे, सत्यम चौरसिया, संजय कुमार, कृषि विभाग से दीपचंद चौरसिया, जिला उद्योग केंद्र से श्री राम मूर्तिमौर्या, उद्यान निरीक्षक मोहम्मद फाजिल ,पवन कुमार सिंह , जिला सेवायोजन अधिकारी संदीप ,राजकीय आईटीआई के प्रधानाचार्य अरुण कुमार ,एमआईएस कौशल विभाग प्रबंधक ओमकार नाथ तिवारी आदि मौजूद रहे। सभी प्रकल्पों के प्रतिनिधियों का अंगवस्त्र प्रदान कर अभिनदंन किया गया।

 

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