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पुरुषार्थ एवं संघर्ष के प्रयाय थे महाराणा प्रताप

 

धोरीमनाः- धोरीमना उपखंड के जाम्भाजी का मंदिर खारी में महाराणा प्रताप की जयंती धूमधाम से मनाई गई इस अवसर पर संबोधित करते हुए वरिष्ठ स्वयसेवक कमलसिंह गेहूं ने बताया कि महाराणा प्रताप क्षात्र धर्म के उपासक संघर्षी एवं पुरुषार्थ के प्रयाय थे। स्वरूप सिंह खारी ने महाराणा प्रताप के बारे में उनकी पूरी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि उनका संघर्ष एवं लड़े गए युद्ध एवं इतिहास को विकृत करके जो पेश किया जा रहा है उस पर अपनी बात रखी। प्रिंसिपल आशुराम ने बताया कि महाराणा प्रताप उस समय की भौतिक चकाचौंध में ना बह कर अपनी मातृभूमि स्वाभिमान और अखंडता के लिए जिए।
सुखराम सारण ने महाराणा प्रताप को हिंदुत्व सम्राट बताया महाराणा प्रताप के कारण ही आज धर्म जिंदा है। दयानंदमान ने बताया कि वर्तमान समय की नजाकत को देखते हुए हमें जातीयता की संकीर्णता से ऊपर उठकर के राष्ट्र के बारे में चिंतन करना चाहिए। किशनाराम गोदारा ने आगंतुकों का स्वागत किया एवं महाराणा को स्मरनात्मक पुष्प अर्पित किए। इस अवसर पर अमरसिंह बामरला, उमेदसिंह सरपंच बामरला, इंद्रसिंह भाऊडा, प्रतापसिंह भाऊडा, भीखसिंह, रणछोड़सिंह राणासर, बागसिंह राणासर, रणजीतसिंह बूल, सुरेश कुमार भादू, हनुमानराम बामरला, गौतम शर्मा व्याख्याता, वीरमाराम भादू अध्यापक, गंगाराम व्याख्याता, शेरसिंह खारी, प्रेमसिंह खारी, भवानीसिंह खारी, आसुराम पंचायत समिति सदस्य प्रतिनिधि दयानंदमान अध्यापक, वीरेंद्र बोला पंचायत समिति सदस्य, भजनलाल ईशरवाल खारी, बाबूराम केनावत ओमप्रकाश भादू गो सेवक, गूगन सिंह चूरू, मगाराम सेजू, देवाराम मेघवाल, खेतसिंह बाछला, डूंगरसिंह बाछला सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। आदर्श क्रांति ग्रुप के सदस्यों ने सकारात्मक सहयोग और जयंती मनाने में अग्रणी भूमिका निभाई व महाराणा प्रताप की जीवनी चरित्र को अपने जीवन में ढालने का संकल्प लिया।

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