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तबाही से बचने हेतु किसानों ने अपने बल पर पैसे इकट्ठे कर घग्गर के किनारों को मजबूत करने के लिए कसी कमर

Subash Bharti by Subash Bharti
in PUNJAB
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तबाही से बचने हेतु किसानों ने अपने बल पर पैसे इकट्ठे कर घग्गर के किनारों को मजबूत करने के लिए कसी कमर

कैप्शन: 2019 में बाढ़ से हुई तबाही का एक दृश्य।

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संगरूर, (सुभाष भारती):
जिला संगरूर की तहसील मूनक के साथ सटकर गुुजरने वाले घग्गर दरिया ने गत वर्षों में हुई तबाही से बचने के लिए इस क्षेत्र के लोग घग्गर दरिया के किनारों को मजबूत करने के लिए जुट गए हैं। हैरत इस बात की है कि लोग प्रशासन की मदद के बिना अपने दम पर लाखों रूपये का खर्च कर अपनी फसलों, घरों व परिवारों व पशुओं को बचाने में जुटे हैं। लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने न तो अभी तक घग्गर दरिया की सफाई करवाई है और न ही मांगने पर गांवों को खाली थैले मुहैया करवाए गए हैं, जिससे बाढ़ को रोका जा सके।
किसानों की मानें तो दरिया के बीच की सफाई न होने के कारण बरसात के दिनों में बाढ़ को रोक पाना बेहद मुश्किल होगा। गांव मकोरड़ साहिब निवासी काबल सिंह सेखों, प्रेम सिंह और काका सिंह का कहना है कि घग्गर दरिया में सफाई न होने के कारण अकसर बरसात के दिनों में कमजोर बांध टूट जाते हंै, इससे किसानों की हजारों एकड़ फसल बर्बाद हो जाती है। हैरत इस बात की है कि प्रशासन ने कभी लोगों की सुध नहीं ली है। लोगों को उनके हाल पर ही छोड़ दिया जाता है। वर्तमान समय में मानसून को देखते हुए गांव सलेमगढ़, भंूूदड़भैणी, सुरजन भैणी और मूनक के किसानों ने 200 से 500 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से प्रत्येक किसान से पैसे इकट्ठे कर खुद बांधों को मिट्टी से पक्का करने का बीड़ा उठाया है। किसान अपने ट्रैक्टरों, जेसीबी मशीनों के साथ मिट्टी निकालकर बांध को मजबूत करने में जुटे हैं। इधर, ग्रामीणों ने प्रशासन से खाली थैलों की मांग की थी ताकि इन थैलों में मिट्टी भरकर बांध पर लगाई जा सके परंतु अभी तक थैले भी मुहैया नहीं करवाए गए हैं, वहीं सिर्फ मनरेगा मजदूरों को काम पर लगाकर अपना पल्ला झाड़ लिया।
2009 में खनौरी से मकरोड़ साहिब तक 22 किमी. तक दरिया के किनारे पक्के किए थे
घग्गर दरिया चंडीगढ़ मोरनी की पहाडिय़ों से निकलता है। सबसे बड़ी परेशानी इस बात की है कि घग्गर दरिया खनौरी क्षेत्र से गुजरती भाखड़ा नहर के नीचे से निकलता है। भाखड़ा पुल नीचा होने के कारण इस क्षेत्र में पानी किनारों से निकलने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त मकरोड़ साहिब से लेकर कड़ैल तक 16 किलोमीटर के क्षेत्र में दरिया के किनारे कच्चे हैं हालांकि वर्ष 2009 में खनौरी से मकरोड़ साहिब तक 22 किलोमीटर तक के दरिया के किनारों को पक्का कर लिया गया था। कच्चे किनारों का खतरा हर समय गांव के लोगों को सताता रहता है। लोगों का कहना है कि घग्गर दरिया के बरसात के दिनों में अख्तियार होने वाले रौद्र रूप का सरकार और प्रशासन को भली भांति पता है लेकिन इसके बावजूद सालों से चली आ रही इस समस्या तो दूर करने के लिए सरकार ने कभी पर्याप्त बजट नहीं रखा। इसी का नतीजा है कि घग्गर की बाढ़ हर साल किसानों की हजारों एकड़ फसल को लील लेती है, किसानों के घरों व मवेशियों का नुक्सान भी बड़े स्तर पर होता है जबकि किसानों को ले-देकर मुआवजे के तौर पर बहुत थोड़ी राशि ही मिलती है।
सुरजन, भूंदड़ भैणी, सलेमगढ़, मूनक व अनदाना में ज्यादा खतरा
* कई बार मचाई तबाही- 18 जुलाई 2019 को पड़ी थी 200 फीट दरार, भरने में लगे थे 6 दिन
गौरतलब है कि पिछले साल 18 जुलाई 2019 को गांव फूलद के पास घग्गर दरिया में करीब 200 फीट दरार पड़ जाने के कारण आधा दर्जन से अधिक गांव बाढ़ के पानी से प्रभावित हुए थे तथा इस पड़ी दरार को प्रशासन व स्थानीय लोगों की मदद से 6 दिनों में दरार को भरा गया था परंतु तब तक लगभग 10 हजार एकड़ की फसल का नुकसान हो गया था। जबकि 83 से अधिक मकानों में दरारें पड़ गई थी। सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रभावित क्षेत्र का हवाई दौरा कर मुआवजे के आदेश दिए थे। लोगों की मानें तो उन्हें मुआवजा की राशि मिल तो गई है परंतु उससे उनके पूरे नुक्सान की भरपाई नहीं हो सकी है। इसके अलावा घग्गर दरिया में पानी बढऩेे से वर्ष 1993, 1998 व 2009 में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। वर्ष 2009 सितंबर में आई बाढ़ के कारण क्षेत्र में धान की फसल सहित पशुओं का चारा पूरी तरह से नष्ट हो गया था।
किनारे तो अपने दम पर पक्के कर लेंगे, पर सफाई करना मुश्किल काम है

किसानों का कहना है कि वह अपने दम पर घग्गर दरिया के कुछ कच्चे बांध को मिट्टी डालकर मजबूत कर लेंगे परंतु घग्गर दरिया की अंदर से सफाई कर पाना बेहद मुश्किल है। यह काम प्रशासन ही कर सकता है, परंतु प्रशासन ने कभी इस तरफ ध्यान नहीं दिया। इस कारण किसान घग्गर दरिया की बाढ़ का शिकार होता रहता है। किसानों की ओर से मांग की गई कि अभी दरिया में पानी इतना नहीं है, इसकी तुरंत सफाई करवाई जाए। घग्गर दरिया के कच्चे बांध के टूटने का सबसे अधिक खतरा गांव सुरजन भैणी, भूंदड़ भैणी, सलेमगढ़, मूनक अनदाना, बनारसी, मकोरड साहिब, चांदू, फूलद आदि गांवों के आसपास रहता है। अकसर इस क्षेत्र में घग्गर दरिया के किनारों पर लगाई गई मिट्टी में बरसात के कारण गड्डे हो जाते हैं, इससे किनारे कमजोर पड़ जाते हैं।

उधर इस संबंधी जिले के अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (विकास) राजिन्द्र बत्तरा का कहना है कि डीसी संगरूर की ओर से प्रभावित क्षेत्र की हर पंचायत को 25 हजार रुपए प्रति पंचायत के अनुसार थैले लेने की प्रवानगी दे दी गई है। दरिया की सफाई का जिम्मा ड्रेन विभाग के पास है। विभाग फंड की कमी के कारण सफाई नहीं करवा सका है तथा फंड आने पर उसकी सफाई भी करवा दी जाएगी।
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