हिंदुत्व का झंडा बुलंद किया है, अब सनातन धर्म के लिए आखिरी सांस तक लड़ने को तैयार हूं: श्री काली माता मंदिर में माथा टेकने के बाद शशि भारद्वाज ने भरी हुंकार
पटियाला 30 जून (प्रेस की ताकत ब्यूरो ) जगदगुरु पंचानंद गिरि महाराज के देहांत के बाद जूना अखाड़े के संरक्षक हरिगिरि महाराज ने जगदगुरु पंचानंद गिरि महाराज के सगे बड़े भाई शशि भारद्वाज को सन्यास दिला कर उनका नाम बदलकर शंकरानंद गिरि रख दिया। जिसके बाद वह आज पहली बार पटियाला पहुंचे। सुबह सबसे पहले शशि भारद्वाज शंकरानंद गिरि ने बीर जी श्मशान घाट पर शेर ए हिंद पवन कुमार शर्मा की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित किये। जिसके बाद पटियाला के विभिन्न बाजारों में दुकानदारों और एसोसिएशनों ने उन्हें फूल मालाएं और रुपये के हार पहना कर सम्मानित किया।
शशि भारद्वाज शंकरानंद गिरि ने उत्तर भारत के प्रसिद्ध श्री काली माता मंदिर में माथा टेकने के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनके सगे छोटे भाई जगद्गुरु पंचानंद गिरि महाराज ने 40 वर्षों तक हिंदुत्व के लिए काम किया और जगद्गुरु के पद तक पहुंचे लेकिन उनकी असामयिक मृत्यु ने उन्हें झकझोर कर रख दिया। जगद्गुरु पंचानंद गिरि महाराज से जुड़े अधिकांश लोग मुझे आगे लाना चाहते थे ताकि उनके द्वारा छोड़े गए अधूरे कार्यों को पूरा किया जा सके।
उन्होंने कहा कि अब मैंने संन्यास लेकर हिंदुत्व का झंडा उठाया है और मैं सनातन धर्म के लिए आखिरी सांस तक लड़ने के लिए तैयार हूं. मैं अपनी आखिरी सांस तक श्री पवन कुमार शर्मा जी द्वारा शुरू किए गए हिंदुत्व के आंदोलन को जारी रखूंगा जिसे बाद में मेरे छोटे भाई जगदगुरु पंचानंद गिरि महाराज ने आगे बढ़ाया और मैं पूरे विश्व में भारत का झंडा फहराने के लिए अपना तन-मन-धन समर्पित कर दूंगा। .
इस मौके पर शिव शक्ति सेवा दल लंगर चैरिटेबल ट्रस्ट के चैयरमैन स्वतंत्र राज पासी के अलावा कई ट्रस्टी, श्री कल्याणी माता गौशाला के ट्रस्टी, बिनती गिरी थानापति जूना अखाड़ा, हिंदू सुरक्षा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष हितेश भारद्वाज, सुभाष बर्मन, कुलदीप सागर, सेमी, रूपिंदर लोचम, धर्मेंद्र उप्पल, अशोक तिवारी, शंकर भारदवाज, भरतइदीप ठाकुर के अतिरिक्त कई संस्थाओं ने भी शंकरानंद गिरी का स्वागत किया।





