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वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे

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in BREAKING, chandigarh, HARYANA, INDIA, POLITICS, PUNJAB
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वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे
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चण्डीगढ़, 07 नवम्बर –

भारत की राष्ट्रीय चेतना को यदि दो शब्दों में समेटा जाए, तो “वन्दे मातरम्”
जितना व्यापक, सशक्त और भावनात्मक संधारक दूसरा कोई शब्द नहीं है। 1875 में
बंगाल के महान कवि बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय जी द्वारा रचित यह गीत आज
150 वर्षों के गौरवपूर्ण सफ़र को पार कर नए भारत की ऊर्जा, विश्वास, “राष्ट्र
प्रथम” की भावना और लोकतांत्रिक भारत की आत्मा को पुनः पुष्ट कर रहा है।
रचना से राष्ट्रगान तक – 150 वर्षों का कालक्रम
वर्ष घटना
1875 बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय ने “वन्दे मातरम्” की रचना की
1882 ‘आनंदमठ’ उपन्यास में प्रकाशित
1896 कांग्रेस अधिवेशन (कलकत्ता) में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने पहली बार
सार्वजनिक गायन किया था
1905 बंग-भंग विरोध आन्दोलन में वन्दे मातरम् ने क्रांति की ज्वाला जगाई
1937 प्रथम दो अंतरों को आधिकारिक स्वीकृति दी
1950 भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद जी ने राष्ट्र गीत का दर्जा
प्रदान किया।
“वन्दे मातरम्” में न भू-भाग मात्र है, न सीमाएं मात्र हैं। इसमें वह अद्भुत मातृत्व
है, जो भारत को भू-राजनीति से परे आध्यात्मिक शक्ति बनाता है।
विवाद

 1923 में काकीनाडा में हुए कांग्रेस अधिवेशन में पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर को
‘वंदे मातरम्’ गाने के लिए आमंत्रित किया गया था, लेकिन उस वर्ष कांग्रेस अध्यक्ष
मौलाना मोहम्मद अली ने धार्मिक आधार पर आपत्ति जताई और कहा कि इस्लाम
में संगीत वर्जित है।
 मुस्लिम लीग के नेताओं को खुश करने के लिए, 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति ने
राष्ट्रीय गीत को औपचारिक रूप से बदलने का निर्णय लिया।
 बाद में भी और कई मौकों पर कांग्रेस और उसके नेताओं ने विभिन्न मंचों पर ‘वंदे
मातरम्’ के प्रति अपनी असहमति दिखाई। एआईएमआईएम नेता श्री अकबरुद्दीन
ओवैसी ने 2017 में मांग की थी कि स्कूलों में छात्रों के लिए ‘वंदे मातरम्’ गाना
अनिवार्य करने वाले सर्कुलर को रद्द किया जाए। तेलंगाना सरकार ने अब कहा है
कि स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य नहीं किया जाएगा।
 2019 में, मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने सचिवालय में ‘वंदे मातरम्’ गाने पर
प्रतिबंध लगा दिया था।
स्वतंत्रता संग्राम में “वन्दे मातरम्” की भूमिका
गुलामी के अंधेरे में यह गीत सैनिकों का कमाण्ड था, क्रांतिकारियों की प्रार्थना था,
सार्वजनिक नेतृत्व का डिजिटल सिग्नेचर था और आम भारतीयों का राष्ट्रभक्ति का
आतंरिक घोष था।
लाठीचार्ज की मार झेलते हुए सड़कों पर जनता के होंठों पर यही था। जेल की
कोठरियों में भगत सिंह–बटुकेश्वर दत्त जैसे क्रांतिकारी यही गुनगुनाते थे। असहयोग,
स्वदेशी, सत्याग्रह सबके केंद्र में मातृभूमि स्तवन का यही स्वर था। अंग्रेजी हुकूमत
द्वारा उस समय “वन्दे मातरम्” बोलना भी देशद्रोह घोषित किया जाता था। परंतु
क़ानून की बंदिशों पर भी यह नारा रुका नहीं। इसका इतिहास हमें बताता है कि
एक नारा – भारत को साम्राज्यवादी सत्ता से जीत सकता है।
आधुनिक भारत की राजनीतिक–लोकतांत्रिक धारा में वन्दे मातरम् की भूमिका

 

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में आज भारत विश्व की
सबसे सशक्त, उच्चतम स्तर वाली, जीवित लोकतंत्रों में अग्रणी है। लोकतंत्र केवल
वोटिंग से नहीं चलता, लोकतंत्र आत्मगौरव, आत्मविश्वास, सांस्कृतिक एकता और
राष्ट्रभाव से चलता है। “वन्दे मातरम्” भारतीय लोकतंत्र को यही चारों स्तम्भ
प्रदान करता है।
यह राष्ट्रहित को सर्वप्रथम रखता है। यह राजनीतिक संघर्ष की मर्यादा को
“मातृभक्ति के अधीन” रखता है। यह धार्मिक विविधता के ऊपर राष्ट्र-विविधता
और सांस्कृतिक एकत्व को स्थापित करता है। यह भारत की भौगोलिक भूमि को
“देवी” स्वरूप में प्रतिष्ठित करता है। इसलिए, यह गीत मात्र 150 वर्ष पुरानी रचना
नहीं है। यह हमारी 5000 वर्ष पुरानी भारतीय सभ्यता की अग्नि लौ का आधुनिक
रूप है।
नए भारत – भविष्य के भारत – वैश्विक भारत में वन्दे मातरम्
आज भारत 21वीं सदी में नेतृत्व पर खड़ा राष्ट्र है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र
मोदी जी के कुशल मार्गदर्शन में प्रौद्योगिकी, AI, रक्षा, अंतरिक्ष, भू-राजनीतिक
साझेदारी, वित्तीय कूटनीति, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे हर क्षेत्र में भारत
अपने मॉडल से दुनिया के सामने एक वैकल्पिक, स्थायी, सशक्त समाधान प्रस्तुत
कर रहा है।
इस भारत की जड़ों की ऊर्जा “प्राचीन राष्ट्रीय संस्कृति” से आती है। यही ऊर्जा
“वन्दे मातरम्” में है। आने वाले 25 वर्षों में, “अमृतकाल” में जब भारत विश्व-
शक्ति बनेगा, उस यात्रा के आध्यात्मिक ईंधन के रूप में “वन्दे मातरम्” रहेगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वन्दे मातरम् की राष्ट्रीय पुनर्स्थापना
हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भारतीय मानस में राष्ट्रगीत को
“शब्द नहीं, संकल्प” के रूप में पुनर्स्थापित किया है। अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत की
संस्कृति को ‘नैरेटिव लीडरशिप’ के साथ स्थापित कर, आज़ादी के पर्वों – विशेषकर

 

75 वर्ष को जन-आन्दोलन में बदलकर, देश के युवाओं में “राष्ट्र प्रथम” की प्रेरणा
देकर, मोदी युग ने “वन्दे मातरम्” को फिर से एक “लाइव वैल्यू सिस्टम” में
परिवर्तित किया है। आज वंदे मातरम सिर्फ गीत नहीं, नागरिक चरित्र निर्माण का
राष्ट्रीय सूत्र बन गया है।
150 वर्षों का यह गौरव सिर्फ इतिहास का अध्याय नहीं है। यह भविष्य की दिशा
है। स्वतंत्रता से डिजिटल क्रांति तक भारत की हर लड़ाई का सार यही था और
आगे भी यही रहेगा। जब बच्चा पहली बार “वन्दे मातरम्” बोलता है, तो वह
भारतीय संविधान की आत्मा में पहला कदम रखता है। आज जब विश्व भारत की
ओर सम्मान से देखता है, तो उस सम्मान का असली आधार यह राष्ट्रभाव है –
“वन्दे मातरम्”। वन्दे मातरम् भारत की सामूहिक चेतना, सामूहिक संकल्प और
सामूहिक अस्मिता का प्रथम, अनन्त, सर्वोच्च उच्चारण है। मेरा मानना है कि वन्दे
मातरम् केवल गीत नहीं, यह भारत का भविष्य-घोष है।

 

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Tags: 150 yearHaryana newsnational anthemNayab Singh Sainivande matram song
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