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इटावा(डा. पुष्पेंद्र सिंह चौहान)- लेफ्टिनेंट जनरल नाथू सिंह राठौड़ – भारतीय सेना के वो जाबांज़ अफसर, जिनकी जुबान और रीढ़ की हड्डी, दोनों लोहे की थी।
जब देश आज़ाद हुआ, तो बात उठी कि भारतीय सेना का पहला भारतीय प्रमुख किसे बनाया जाए? पंडित नेहरू ने नाथू सिंह जी को यह पद संभालने का प्रस्ताव दिया। लेकिन, नाथू सिंह जी ने जो जवाब दिया, वो आज भी इतिहास में गूंजता है। उन्होंने साफ कह दिया कि “सिर्फ इसलिए कि हम आज़ाद हो गए हैं, हम योग्यता और वरिष्ठता को नहीं भूल सकते।” उन्होंने जनरल करियप्पा का नाम सुझाया क्योंकि वे उनसे वरिष्ठ थे। उन्होंने पद के लालच से ऊपर ‘सेना के अनुशासन’ और ‘राजपूती उसूलों’ को रखा।













