दिन – शुक्रवार
विक्रम संवत् – 2081
अयन – दक्षिणायन
ऋतु – हेमन्त
मास – मार्गशीर्ष
पक्ष – शुक्ल
तिथि – त्रयोदशी शाम 07:40 तक, तत्पश्चात चतुर्दशी
नक्षत्र – भरणी प्रातः 07:50 तक, तत्पश्चात कृत्तिका प्रातः 05:48 दिसम्बर 14 तक, तत्पश्चात रोहिणी
योग – शिव प्रातः 11:54 तक तत्पश्चात सिद्ध
राहु काल – प्रातः 11:14 से दोपहर 12:34 तक
सूर्योदय – 07:16
सूर्यास्त – 05:51
दिशा शूल – पश्चिम दिशा में
ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 05:26 से 06:19 तक
अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:13 से दोपहर 12:56 तक
निशिता मुहूर्त- रात्रि 12:08 दिसम्बर 14 से रात्रि 01:01 दिसम्बर 14 तक
व्रत पर्व विवरण – प्रदोष व्रत
विशेष – त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
सर्दियों के लिए बल व पुष्टि का खजाना
रात को भिगोयी हुई १ चम्मच उड़द की डाल सुबह महीन पीसकर उसमें २ चम्मच शुद्ध शहद मिला के चाटें । १ – १.३० घंटे बाद मिश्रीयुक्त दूध पियें । पूरी सर्दी यह प्रयोग करने से शरीर बलिष्ठ और सुडौल बनता है तथा वीर्य की वृद्धि होती है ।
दूध के साथ शतावरी का २ – ३ ग्राम चूर्ण लेने से दुबले-पतले व्यक्ति, विशेषत: महिलाएँ कुछ ही दिनों में पुष्ट जो जाती हैं । यह चूर्ण स्नायु संस्थान को भी शक्ति देता हैं ।
रात को भिगोयी हुई ५ – ७ खजूर सुबह खाकर दूध पीना या सिंघाड़े का देशी घी में बना हलवा खाना शरीर के लिए पुष्टिकारक है ।
रोज रात को सोते समय भुनी हुई सौंफ खाकर पानी पीने से दिमाग तथा आँखों की कमजोरी में लाभ होता है ।
आँवला चूर्ण, घी तथा शहद समान मात्रा में मिलाकर रख लें । रोज सुबह एक चम्मच खाने से शरीर के बल, नेत्रज्योति, वीर्य तथा कांति में वृद्धि होती है ।हड्डियाँ मजबूत बनती हैं ।
१०० ग्राम अश्वगंधा चूर्ण को २० ग्राम घी में मिलाकर मिट्टी के पात्र में रख दें । सुबह ३ ग्राम चूर्ण दूध के साथ नियमित लेने से कुछ ही दिनों में बल-वीर्य की वृद्धि होकर शरीर हृष्ट-पुष्ट बनता है ।
शक्तिवर्धक खीर : ३ चम्मच गेहूँ का दलिया व २ चम्मच खसखस रात को पानी में भिगो दें । प्रात: इसमें दूध और मिश्री डालकर पकायें । आवश्यकता अनुसार मात्रा घटा-बढ़ा सकते हैं । यह खीर शक्तिवर्धक है ।
हड्डी जोडनेवाला हलवा : गेहूँ के आटे में गुड व ५ ग्राम बला चूर्ण डाल के बनाया गया हलवा (शीरा) खाने से टूटी हुई हड्डी शीघ्र जुड़ जाति है । दर्द में भी आराम होता है ।
सर्दियों में हरी अथवा सुखी मेथी का सेवन करने से शरीर के ८० प्रकार के वायु-रोगों में लाभ होता है ।






