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सरकार द्वारा माइनिंग पालिसी न बनाए जाने पर क्रैशर उद्योग समाप्त होने के किनारे पहुंचा

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सरकार द्वारा माइनिंग पालिसी न बनाए जाने पर क्रैशर उद्योग समाप्त  होने के किनारे पहुंचा
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पंजाब में अकाली/ भाजपा सरकार ने पंजाब के क्रैशर उद्योग को मरने की कागार पर छोड़ दिया था। उस सरकार ने अपने 10 वर्षों के राज में क्रैशर उद्योग को प्रफुल्लित करने के वायदे करके समय निकाल लिया। क्रैशर उद्योग के लिए किया कुछ नहीं बल्कि माइनिंग ठेकेदारों को खड़े करके इस उद्योग को और कमज़ोर कर दिया व यह उद्योग जो मज़बूत व शक्तिशाली होना चाहिए था, दिन-प्रतिदिन गिरता जा रहा है। फिर विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस ने क्रैशर उद्योग को दोबारा जिंदा करने और अपने पैरों पर खड़ा करने का स्वप्न देखा व नई माइनिंग पालिसी लाने का वायदा किया परन्तु आज 10 माह का समय बीत जाने के बाद भी सरकार ने किसी माइनिंग पालिसी की घोषणा नहीं की व न ही क्रैशर इंडस्ट्री की गिर रही हालत को सुधारने के लिए कोई उपाय किया। जिस कारण क्रैशर इंडस्ट्री समाप्त होने के किनारे पहुंच गई है। कांग्रेस ने अपने मैनीफैस्टो में माइनिंग पालिसी बनाने का वायदा करके भी पालिसी नहीं बनाई। पठानकोट ज़िले में 250 के करीब क्रैशर लगे थे। क्रैशर मालिकों ने करोड़ों का कज़र्ा लेकर क्रैशर लगाए, मशीनरी खरीदी व प्रत्येक माह लाखों की किश्तें दे रहे हैं। इस इंडस्ट्री पर हज़ारों परिवार रोज़ी रोटी कमा रहे हैं। परन्तु जब से सरकार ने माइनिंग ठेकेदारी प्रथा आरम्भ की क्रैशर वालों का कार्य ठप्प होता गया। आज यह स्थिति है कि करीब 100 क्रैशर बंद पड़े हैं व 50-60 के लगभग क्रैशर मालिकों ने अपने क्रैशर हमेशा के लिए बंद करके अन्य कार्य आरम्भ कर लिए हैं। जिसके साथ क्रैशर के साथ जुड़े सैकड़ों परिवार बेरोज़गार हो गए हैं व इनके चूल्हे ठण्डे पड़े हुए हैं। जिसके साथ ज़िले में बेरोज़गारी दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। क्रैशरों के बंद होने के साथ क्रैशर मालिकों पर कज़र्े का बोझ बढ़ता जा रहा है व क्रैशर मालिक बैंकों के डिफाल्टर हो गए हैं। समूह क्रैशर वालों की मांग है कि माइनिंग की लीज़ सरकार क्रैशर वालों को दे। माइनिंग हिमाचल व जम्मू-कश्मीर जैसे बिजली के बिलों पर लाई जाए। जिसके साथ माइनिंग माफिया समाप्त हो जाएगा। इसके साथ सरकार का रेवेन्यू बढ़ेगा, लोगों को रेत बजरी सस्ती मिलेगी व क्रैशर उद्योग की मंदी की मार से बाहर निकलेगी। आज माइनिंग माफिया के कारण रेत, बजरी के रेट आसमान छू रहे हैं व गरीब आदमी सिर पर छत का स्वप्न भी नहीं देख पा रहा। उन्होंने कहा 5 एकड़ तक जमीन की माइनिंग के लिए बोली ज़िला स्तर पर और एक एकड़ तक स्टेट स्तर पर हो जाया करेगी। नई पालिसी के अनुसार लोगों को सस्ती व बढ़िया निर्माण सामग्री प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कोई भी क्रैशर बंद नहीं होने दिया जाएगा बल्कि मेरी इच्छा है कि 50 क्रैशर और लगें ताकि लोगों को रोज़गार मिल सके। क्योंकि क्रैशर इंडस्ट्री हमारे ज़िले की सबसे बड़ी इंडस्ट्री है। जहां हज़ारों लोग अपना पेट पाल रहे हैं।

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