Saturday, September 5, 2026
Press Ki Taquat
No Result
View All Result
  • Login
  • HOME
  • BREAKING
  • PUNJAB
  • HARYANA
  • INDIA
  • WORLD
  • SPORTS
  • ENTERTAINMENT
  • ENGLISH NEWS
  • E-Paper
  • CONTACT US
  • HOME
  • BREAKING
  • PUNJAB
  • HARYANA
  • INDIA
  • WORLD
  • SPORTS
  • ENTERTAINMENT
  • ENGLISH NEWS
  • E-Paper
  • CONTACT US
No Result
View All Result
Press Ki Taquat
No Result
View All Result
Home Ambala

शिक्षा के मंदिरों का नवीकरण करूंगा:-दमनप्रीत सिंह

Jagdeep Singh by Jagdeep Singh
in Ambala
0
शिक्षा के मंदिरों का नवीकरण करूंगा:-दमनप्रीत सिंह
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

 

कोरोनाकाल के निजी स्कूलों के बच्चों के सभी बकाया माफ हों।

शिक्षा अधिकार अधिनियम बनाने से शिक्षित नही होगा हरियाणा।

निजी स्कूलों की फीस वृद्धि, किताबों को एक निश्चित पब्लिशर्स व दुकान से खरीदने और हर वर्ष बच्चों की वर्दी में बदलाव व निश्चित दुकान से खरीदने के लिए अभिभावकों को बाध्य करने के मामले में निजी स्कूलों की मनमानी की निंदा करते हुए युवा इनैलो नेता दमनप्रीत सिंह ने कहाकि शिक्षा के मंदिरों का व्यवसायीकरण रोकने के लिए सरकार कोई ठोस व प्रभावशाली नीति बनाए ताकि प्रत्येक व्यक्ति का अपने बच्चे को आधुनिक व उत्तम शिक्षा देने का उद्देश्य पूरा हो सके। सरकार के पास फंड व स्थान की कोई कमी नही बस नियत व नीति की कमी है। उन्होंने कहाकि अम्बाला छावनी की जनता ने मौका दिया तो शिक्षा के मंदिरों का नवीनीकरण करूंगा। सरकार की शिक्षा नीति बारे कहते हुए उन्होंने कहाकि कोरोनाकाल में अनगिनत अभिभावकों के रोजगार या तो चले गए या फिर उनकी आमदन आधे से भी कम रह गयी लेकिन निजी स्कूलों ने बच्चों से फीस, वार्षिक शुल्क व अन्य फंड की वसूली के मामले में किसी भी तरह की मानवता नही दिखाई जिसका नतीजा यह निकला कि अधिकतर अभिभावक या तो आज स्कूलों के देनदार है या फिर उन्होंने निजी स्त्रोतों से कर्ज उठाकर बच्चों की फीस का भुगतान किया जिसके परिणामस्वरूप वो कर्ज में डूब गए। सरकार ने निजी स्कूलों का कोरोनाकाल का प्रॉपर्टी टैक्स भी माफ किया और अन्य सहूलतें भी दी लेकिन स्कूलों ने बच्चों को कोई राहत नही दी। अभिभावकों की मोजूदा आर्थिक स्तिथि को देखते हुए निजी स्कूलों को कोरोनाकाल के सभी बच्चों के सभी बकाया माफ कर देने चाहिए या फिर सरकार को इस माफी की व्यवस्था करनी चाहिए। आज अभिभावकों की स्तिथि यह है कि फीस व वार्षिक शुल्क ओर अन्य चार्जेज न भरने के कारण वो सड़को पर है, अपने बच्चों को निजी स्कूलों से निकालकर सरकारी स्कूलों में दाखिल करवाना चाहते हैं लेकिन निजी स्कूल बिना पिछले बकाया डिडे बच्चों को स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट नही दे रहे और बिना स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट के सरकारी स्कूल मे दाखिला नही मिलता। सरकार ने पूर्व में स्कीम चलाई थी कि कोई भी बच्चा बिना स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट के सरकारी स्कूल में दाखिला ले सकता है, स्कीम अच्छी थी लेकिन सरकार ने न जाने किस कारण स्कीम को वापिस ले लिया। सरकारी स्कूलों की व्यवस्था पहले ही दयनीय है। हालात यह है कि सरकारी स्कूलों के अध्यापकों के बच्चे भी निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। स्कूलों के हालात कैसे सुधरेंगे इस पर सरकार का कोई ध्यान नही है। जितना खर्च सरकार द्वारा शिक्षा पर खर्च किया जाता है उतने खर्च में पूरे प्रदेश के बच्चों को अच्छी शिक्षा दी जा सकती है लेकिन व्यवस्था में ही खराबी है। सरकारी स्कूल के अध्यापक जितना वेतन प्राप्त करते हैं उतने वेतन में निजी स्कूलों के 5 अध्यापको का वेतन दिया जा सकता है। सरकार ने संस्कृति मॉडल स्कूल की शुरुआत की है जो इंग्लिश माध्यम से शिक्षा देंगे लेकिन स्कूलों के हालात व शिक्षा का स्तर वही है, उसमें कोई इम्प्रोवमेंट नही हुई। यही नही इन स्कूलों में भी 500 रुपये दाखिला और प्रतिमाह 200 रुपये फीस का प्रावधान कर दिया गया। गरीब बच्चों को उत्तम दर्जे की निशुल्क शिक्षा देने के लिए वर्ष 2003 में इनैलो सरकार ने धारा 134A बनाई थी जिसमे प्रत्येक निजी स्कूल में 25 प्रतिशत बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने का प्रावधान था लेकिन बहुत अफसोस कि बात है कि वर्ष 2013 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उक्त धारा में निशुल्क शिक्षा के अधिकार को कम करके 10 प्रतिशत कर दिया। मोजूदा सरकार को स्तर में आए आठवां वर्ष है लेकिन 134A में बच्चों के दाखिले में लगातार स्कूलों व अभिभावकों में द्वंद चल रहा है। पिछले वर्ष के बच्चों को अभी तक निजी स्कूलों ने दाखिला नही दिया क्योंकि सरकार ने स्कूलों की निर्धारित फीस की क्षतिपूर्ति नही की। जिसके लिए मामला उच्च न्यायालय में भी चल गया और अभिभावक भी सड़को पर उतर गए। मामले को बिगड़ता देख सरकार ने धारा 134 A को ही खत्म कर दिया। अभिभावकों के विरोध के चलते सरकार ने मात्र 13 दिन बाद ही यूटर्न लेते हुए 134A को पुनः लागु कर दिया। इसने भी इंटरेस्टिंग बात यह कि सरकार ने 134A के तहत निजी स्कूलों को दी जाने वाली फीस पांचवी तक के लिए 500 से बढ़ाकर 700 प्रति बच्चा कर दी और आठवी तक के लिए 800 से बढ़ाकर 900 रुपये प्रति बच्चा कर दी जबकि इसके लिए किसी स्कूल ने कोई मांग या प्रदर्शन नही किया। निजी स्कूल तो अपना बकाया मांग रहे थे और सरकार ने उन्हें बिना मांग के खुश कर दिया। सरकार की प्रणाली से लगता है कि सरकार शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। कोरोनाकाल में सरकार ने निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर नियंत्रण के लिए अनेक पत्र जारी किए लेकिन उन्हें लागू नही करवाया जा सका, यह सरकार की विफलता है। बच्चे देश का भविष्य है और भविष्य से खिलवाड़ सर्वथा अनुचित व निंदनीय है। उन्होंने कहाकि इनैलो सरकार आने पर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था में सुधार करके उत्तम दर्जे की शिक्षा प्रत्येक बच्चे के अधिकार के रूप में निश्चित करेंगें और सरकारी स्कूलों का स्तर निजी स्कूलों से भी ऊंचा करेंगे ताकि सरकारी स्कूलों की अहमियत निजी स्कूलों से भी अधिक बने और बच्चे उत्तम शिक्षा ग्रहण कर सकें।

Post Views: 102
Previous Post

पंजाब में बिजली के तीन सौ यूनिट माफ करने पर जताई खुशी हरियाणा के साथ-साथ पूरे देश में होगा आम आदमी पार्टी का विस्तार – विनोद धीमान

Next Post

श्री जी आर एस डी. स्कूल में मनाया गया श्री हनुमान जन्मोत्सव

Next Post
श्री जी आर एस डी. स्कूल में मनाया गया श्री हनुमान जन्मोत्सव

श्री जी आर एस डी. स्कूल में मनाया गया श्री हनुमान जन्मोत्सव

Press Ki Taquat

© 2026 presskitaquat.com - Powered by Press Ki Taquat+919041568800

Navigate Site

  • HOME
  • BREAKING
  • PUNJAB
  • HARYANA
  • INDIA
  • WORLD
  • SPORTS
  • ENTERTAINMENT
  • ENGLISH NEWS
  • E-Paper
  • CONTACT US

Follow Us

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • HOME
  • BREAKING
  • PUNJAB
  • HARYANA
  • INDIA
  • WORLD
  • SPORTS
  • ENTERTAINMENT
  • ENGLISH NEWS
  • E-Paper
  • CONTACT US

© 2026 presskitaquat.com - Powered by Press Ki Taquat+919041568800