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योगी सरकार का एक साल: 5 बड़े चुनावी वादों में से ज्यादातर अधूरे, कुछ पर काम ही शुरू नहीं हुआ

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योगी सरकार का एक साल: 5 बड़े चुनावी वादों में से ज्यादातर अधूरे, कुछ पर काम ही शुरू नहीं हुआ
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भाजपा ने 28 जनवरी, 2017 को उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव-2017 के लिए घोषणा पत्र जारी किया था। इसमें यूपी में अपराध और भ्रष्टाचार को खत्म कर, विकास और गरीबों की बेहतरी के लिए काम करने के दावे किए थे। भाजपा बहुमत के साथ जीती और 19 मार्च, 2017 को योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनकी सरकार का एक साल पूरा होने पर प्रेस पब्लिक ने उनके 5 वादों की जमीनी हकीकत जानी।

1) किसानों की कर्जमाफी

वादा: किसानों का पूरा कर्ज माफ होगा। बिना ब्याज कर्ज दिया जाएगा।
सरकार ने क्या किया: योगी ने पहली कैबिनेट मीटिंग में 36 हजार 359 करोड़ रुपए की कर्ज माफी का एलान किया। 78 लाख किसानों को कर्जमाफी का लाभ मिलना था।
हकीकत:अभी तक 17.30 लाख किसानों का कर्ज माफ हुआ। यह कुल टारगेट का सिर्फ 22% है। देवरिया, वाराणसी, गोरखपुर और कुशीनगर को छोड़कर किसी भी जिले में दूसरे चरण की कर्जमाफी के प्रमाण पत्र बांटने का काम शुरू नहीं हुआ है।
दलील:कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही किसानों को कर्जमाफी का लाभ मिला है। दूसरे चरण के प्रमाणपत्र भी जल्द बांटे जाएंगे।
आरोप:नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने कहा कि कर्जमाफी की आड़ में सरकार ने खेती का बजट 70.13% कम कर दिया। किसानों को छला गया है।

2) शिक्षा और रोजगार
वादा: पहली से 8वीं तक के बच्चों को स्वेटर, मौजे और जूते मुफ्त दिए जाएंगे। ग्रेजुएट तक लड़कियों और 12वीं तक लड़कों को लैपटॉप मुफ्त दिया जाएगा।
सरकार ने क्या किया: सरकार ने दो बार टेंडर निकाल, लेकिन दिसंबर 2017 तक प्रॉसेस पूरी नहीं हो पाई। बाद में कलेक्टर को अपने स्तर पर टेंडर कराने को कहा गया। फ्री लैपटॉप वितरण योजना- 2017 शुरू की।
हकीकत:1.5 करोड़ बच्चों में से सर्दी खत्म होने तक सिर्फ 45% बच्चों को स्वेटर बांटे गए। 22 से 23 लाख स्टूडेंट्स में से अभी किसी को भी फ्री लैपटॉप नहीं मिला।
दलील: विभाग की मंत्री अनुपमा जायसवाल ने कहा कलेक्टर को निर्देश दिए थे सभी बच्चों को स्वेटर बांट दिए गए हैं।
आरोप: सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने कहा कि स्वेटर बांटने में सबसे बड़ा भ्रष्टाचार हुआ। ठंड खत्म होने के बाद दिखावे के लिए स्वेटर बांटे गए।

3) बिजली की समस्या
वादा: 2019 तक हर घर में बिजली। 5 साल में 24 घंटे बिजली मिलने लगेगी।
सरकार ने क्या किया:राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा के मुताबिक, सपा सरकार में 14 घंटे बिजली मिल रही थी, अब 16 से 18 घंटे मिल रही है। हालांकि, लोड बढ़ने से किसानों को ज्यादा राहत नहीं मिली।
हकीकत: बिजली का निजीकरण किया गया। रेट 50 से 150 फीसदी तक बढ़े। गर्मी शुरू होते ही शहरों में भी बिजली कटौती शुरू हो गई है।
दलील: ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा का दावा है कि सपा सरकार ने पांच साल में जितने ट्रांसफार्मर बदले उतने हमने 1 साल में बदल दिए। करीब 37 हजार ट्रांसफार्मर खराब हो गए थे।
आरोप: सपा नेता रामगोविंद चौधरी ने कहा कि केंद्र के सहारे यूपी में बिजली की सप्लाई की जा रही है। बिजली का रेट बढ़ाकर अवैध वसूली की जा रही है।

4) सेहत का ख्याल
वादा: राज्य में 25 सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और 6 एम्स बनाएंगे।
सरकार ने क्या किया: बजट में सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल और एम्स के लिए पहले चरण में 4323.89 करोड़ रुपए रखे गए हैं।
हकीकत:अभी तक किसी भी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल या एम्स के लिए जमीन तक तय नहीं हुई है। गोरखपुर एम्स का शिलान्यास अखिलेश सरकार में किया गया था। डेढ़ साल बीत गया, लेकिन इसका भी निर्माण शुरू नहीं हो पाया है।
दलील: स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह का कहना है कि यूपी में स्वास्थ्य की समस्या बहुत ही जटिल थी। पिछली सरकारों ने स्वास्थ्य के बजट में घोटाले किए। एक साल में हमने बेहतर इंतजाम किए।
आरोप: सपा के सीनियर लीडर और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने कहा कि सरकार काम करने की बजाए अस्पतालों का भगवाकरण करवा रही है। बीआरडी कॉलेज की घटना सरकार की सबसे बड़ी नाकामी है।

5) गड्ढा मुक्त सड़कें
वादा:प्रदेश में सभी सड़कें 15 जून 2017 तक गड्ढा मुक्त होंगी।
सरकार ने क्या किया: सरकार ने अलग-अलग विभागों को जिम्मेदारी सौंपी। कुल 1 लाख 21 हजार 816 किलोमीटर सड़क गड्ढा मुक्त की जानी थी।
हकीकत:सिर्फ 61 हजार 433 किलोमीटर यानी सिर्फ 50% सड़कें ही गड्ढा मुक्त हो पाई। टारगेट पूरा करने के लिए सिर्फ तीन महीने से भी कम वक्त बचा है।
दलील: डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का कहना है कि सड़कों को गड्डा मुक्त करने के लिए हम लगातार काम कर रहे हैं। विभाग के पास उचित बजट नहीं था फिर भी हमने अन्य विभागों के सहयोग से लक्ष्य को पूरा किया है।
आरोप: कांग्रेस प्रवक्ता सुरेन्द्र राजपूत का कहना है कि, गड्डे मुक्त सड़क का दावा कुछ ही जिलों में सफल हुआ है। जिन सड़कों को गड्डा मुक्त किया गया है वो फिर से उसी तरह हो गई हैं।

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