छिंदवाड़ा(सुशील सिंह परिहार)- देश के 44 करोड़ साधकों की आस्था का एवं विश्व के 167 देशों के साधकों का आध्यात्मिक उत्थान केंद्र संत श्री आशाराम जी आश्रम अहमदाबाद का जमीन मामला जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है । इस सम्बंध में सामाजिक कार्यकर्ता भगवानदीन साहू ने दिनांक 30 अप्रैल 2026 को स्वयं माननीय उच्चत्तम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत होकर विधि अनुसार प्रार्थना पत्र दिया था । जिस पर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेकर याचिका दर्ज की जिसका क्रमांक 55297/SCI /PIL / 2026 है । याचिका में बताया कि गुजरात प्रशासन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के कानूनों का जानबूझकर अवहेलना की जा रही है । करोड़ो करोड़ो लोगों की आस्था का हनन किया जा रहा है । एक षड्यंत्र के तहत अहमदाबाद महानगर पालिका आश्रम की जमीन खाली करवाने के बार बार असंवैधानिक तरीके से नोटिस दे रही हैं । जबकि आश्रम प्रबंधन के पास उक्त जमीन के सभी वैधानिक दस्तावेज उपलब्ध हैं । उक्त आश्रम से देश के 450 आश्रम ,18 हजार बाल संस्कार केंद्र , सैकड़ों गुरुकुल , देश मे 14 फ़रवरी को 74 करोड़ माता पिता का पूजन ,पर्यावरण संरक्षण हेतु इस वर्ष में देश मे 4 लाख जगह तुलसी पूजन आयोजन , देशभर के आदिवासी क्षेत्रों में प्रतिवर्ष भंडारे कर सनातन संस्कृति के महत्व से अवगत कराना आदि सेवा कार्य संचालित हो रहें हैं। इन सेवा कार्यों के सफल संचालन हेतु सन 2019 में अमेरिका जैसे सुपर पावर देश की केलिफोर्निया विधानसभा पूज्य बापूजी को सर्वोच्च सम्मान दिया ।जबकि उस समय पूज्य बापूजी जोधपुर जेल में थे । विश्व की सबसे बड़ी महाशक्ति अमेरिका द्वारा सम्मानित किया जाना पूज्य बापूजी का बेगुनाही का सबूत हैं ।षड्यंत्रकारी लोग आश्रम बन्द करवाने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं। एक षड्यंत्र के तहत गुजरात प्रशासन के लोग साधकों और सत्तारूढ़ सरकार का आपस में भिड़वा रहे हैं । सत्तारूढ़ सरकार की छवि खराब करने के उद्देश्य से यह कार्य किया जा रहा है । वहीं अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के कानूनों की भी अनदेखी हो रही हैं । यह कानून विश्व के सभी देशों के लिए बन्धनकारी है । माननीय सुप्रीम कोर्ट ने इसे गम्भीरता से लेते हुए याचिका सुनवाई हेतु दर्ज की है जिसकी सूचना SMS के माध्यम से याचिकाकर्ता को दी । श्री साहू ने बताया कि जब तक माननीय सुप्रीम कोर्ट में प्रकरण विचाराधीन है तब तक अहमदाबाद प्रशासन की कोई भी कार्यवाही माननीय न्यायालय की अवमानना मानी जाएगी ।













