छिंदवाड़ा.(भगवानदीन साहू)- धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों ने महामहिम राष्ट्रपति , प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में बताया कि उत्तर भारत जिसमें पंजाब , हरियाणा , जम्मू-कश्मीर , उत्तराखंड और दिल्ली के राज्य आतें हैं । पिछले सप्ताह जो प्रकृति आपदा, बाढ़ आई इसके जिम्मेदार न्याय व्यवस्था और गन्दी राजनीतिक व्यवस्था है । देशभर के लाखों साधकों और कई सामाजिक संगठनों ने समस्त जिला केंद्रों पर 29 अगस्त को परम पूज्य संत श्री आशाराम जी बापू पर अत्याचार रोकने के लिए आपको ज्ञापन देकर आगह किया था कि आम लोगों को प्रकृति प्रकोप से बचाना है तो सन्तों पर अत्याचार बन्द करो । जिला केंद्र पर भी बहुत से धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने माँग कर उदाहरण देकर निवेदन किया था। सभी के प्रार्थना पर गौर करने की बजाय 30 अगस्त को जोधपुर उच्च न्यायालय ने उनकी अंतरिम जमानत रद्द कर उन्हें उचित स्वास्थ्य लाभ से वंचित कर पुनः जेल में डाल दिया । 29 अगस्त को जो ज्ञापन दिया था वो 31 अगस्त काला दिवस के निमित्त था। उसमें सब कुछ उल्लेख था । 30 अगस्त के बाद पूरा जम्मू-कश्मीर , पंजाब , उत्तराखंड , हरियाणा और दिल्ली भीषण बाढ़ की चपेट में आ गया जिसमें लाखों लोग अकारण मौत का ग्रास बन गए और लाखों लोग बेघर हो गए । प्रकृति का प्रकोप इतना भयंकर था कि कटरा में वैष्णो देवी माता की यात्रा बन्द , अमरनाथ की यात्रा बन्द , बद्रीनाथ , केदारनाथ की यात्रा बन्द , ऋषि केस के घाट बन्द , मणिमहेश की यात्रा बन्द , धारी देवी की यात्रा बन्द यह सब धार्मिक यात्रा बन्द का सीधा सा मतलब है भगवान स्वयं इंसानों से रुष्ठ हैं । सरकार को न्याय व्यवस्था को आगाह करने के बाद राजनीतिक द्वेष के कारण ऐसा हुआ है । जिसमें लाखों लोग बेवजह मारे गए । ऐसा 25 अप्रैल 2018 को पूज्य बापूजी को जबरन सजा सुनाई थी तब सन 2019 को कोविड 19 आकर करोड़ो लोगों की मौत का कारण बना । जब तक पूज्य बापूजी पर अत्याचार जारी रहेगा प्रकृति अपना मौत का तांडव करते रहेगी । हमारी बात आपको अंधविश्वासी लगेगी , लेकिन थोड़ा इतिहास पढ़ कर सबक लें, सब जानकारी हो जाएगी । आज नहीं तो कल आपकी 21 पीढ़ी को नारकीय यातनाएं भुगतकर इन मौतों का जवाब कहीं ना कहीं देना पड़ेगा यही प्रकृति का विधान है। सरकार से प्रार्थना है कि 44 करोड़ साधकों की धार्मिक भावनाओं का आदर करें । ज्ञापन देते समय साध्वी रेखा बहन , साध्वी प्रतिमा बहन , समिति के अध्यक्ष मदन मोहन परसाई , आधुनिक चिंतक हरशूल रघुवंशी , राष्ट्रीय बजरंग दल के नितेश साहू , कुंबी समाज के युवा नेता अंकित ठाकरे , कलार समाज के प्रतिष्ठित बबलू सूरज प्रसाद माहोरे , साहू समाज के ओमी साहू , कुंबी समाज के मार्गदर्शक सुभाष इंगले , अशोक कराडे , आई टी सेल के प्रभारी भूपेश पहाड़े , ओमप्रकाश डहेरिया ,रामेश्वर कर्मवीर , अश्विन पटेल , नारायण ताम्रकार आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे ।













