इटावा(डा. पुष्पेंद्र सिंह चौहान)- सन् 1990 तक खालिस्तानी आंदोलन काफी उग्र था, उसी समय पंजाब के अलगाववादी नेता “सिमरनजीत सिंह मान” लम्बी तलवार धारण किए प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से मिलने पहुँच गए।
सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक लिया कि, ऐसा प्राणघातक शस्त्र लेकर प्रधानमंत्री से नहीं मिल सकते।
श्रध्देय चन्द्रशेखर तक बात पहुँची तो उन्होंने मान को तलवार के साथ ही आने की इजाजत दे दी।
जिस सुरक्षा अधिकारी पर चन्द्रशेखर की निजी सुरक्षा की जिम्मेवारी थी, उसने सावधानीवश दरवाजा अधखुला रहने दिया, जिससे वह मान व उनकी तलवार पर नजर रख सके। उसने प्रधानमंत्री व मान के बीच की वार्ता सुनी और देखा कि चन्द्रशेखर के सामने पहुँचकर मान ने आधी तलवार खींची और बोले : “यह पुरखों से मेरे पास है और बहुत घातक है।”
इस पर चंद्रशेखर ने मुँहतोड़ जवाब दिया, उन्होंने मान से कहा “इसे म्यान में रख लो”
मेरे पुरखों के घर बलिया में इससे बड़ी तलवार मौजूद है जो इससे ज्यादा संहारक है।
इतनी सी बात ने मान और उनकी तलवार दोनों को ठिकाने लगा दिया।
:- रशीद किदवई की किताब “भारत के प्रधानमंत्री” से साभार












