Thursday, September 3, 2026
Press Ki Taquat
No Result
View All Result
  • HOME
  • BREAKING
  • PUNJAB
  • HARYANA
  • INDIA
  • WORLD
  • SPORTS
  • ENTERTAINMENT
  • CAREER
  • EDUCATION
  • DHARAM
  • E-Paper
  • CONTACT US
No Result
View All Result
  • HOME
  • BREAKING
  • PUNJAB
  • HARYANA
  • INDIA
  • WORLD
  • SPORTS
  • ENTERTAINMENT
  • CAREER
  • EDUCATION
  • DHARAM
  • E-Paper
  • CONTACT US
No Result
View All Result
Press Ki Taquat
No Result
View All Result
ADVERTISEMENT
Home BREAKING

शिवलिंग ।।*

admin by admin
in BREAKING, Dharm, INDIA
Reading Time: 1 min read
A A
0
शिवलिंग ।।*
0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
ADVERTISEMENT

RelatedPosts

गैंगस्टरों ते वार का 173वां दिन: पंजाब पुलिस की 1074 स्थानों पर छापेमारी; 911 काबू

विजिलेंस ब्यूरो ने सहायक उप-निरीक्षक तथा एसएचओ के रीडर को 1,00,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ काबू किया

0
ऋषि प्रसाद सेवाधारी सम्मानित

ऋषि प्रसाद सेवाधारी सम्मानित

0
पंजाब शिक्षा क्रांति: रिकॉर्ड NEET, JEE नतीजों के लिए भगवंत मान सरकार ने 300 से अधिक प्रिंसिपलों को सम्मानित किया

भगवंत मान सरकार द्वारा अमृतसर में बेहतर स्वच्छता सेवाएँ सुनिश्चित करने के लिए 60 एम.एल.डी. सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को मंज़ूरी, जल्द शुरू होगा काम

0
कल का पंचांग

कल का पंचांग

0
श्रीलंका टेस्ट सीरीज से पहले केएल राहुल ने गीली/सीली पिच पर स्पिन का सामना करने का अभ्यास क्यों किया?

श्रीलंका टेस्ट सीरीज से पहले केएल राहुल ने गीली/सीली पिच पर स्पिन का सामना करने का अभ्यास क्यों किया?

0
गीतकार और संवाद लेखक मनोज मुंतशिर ने फिल्म ‘आदिपुरुष’ को एक ‘असफल प्रयास’ (Failed Attempt) स्वीकार करते हुए कहा है कि इसकी तुलना नितेश तिवारी की आगामी फिल्म ‘रामायण’ से नहीं की जानी चाहिए।

गीतकार और संवाद लेखक मनोज मुंतशिर ने फिल्म ‘आदिपुरुष’ को एक ‘असफल प्रयास’ (Failed Attempt) स्वीकार करते हुए कहा है कि इसकी तुलना नितेश तिवारी की आगामी फिल्म ‘रामायण’ से नहीं की जानी चाहिए।

0
ADVERTISEMENT
  • Facebook
  • Twitter
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Facebook Messenger
  • Copy Link

शिवलिंग पर चढाये जल को लाँघा नही जाता और शिवलिंग की परिक्रमा आधी की जाती है. शिवलिंग पर चढ़ाया हुआ नैवेद्य भी नहीं खाया जाता, उसे गऊ वंश को खिला दिया जाता है क्योंकि उनमें ही इसकी शक्ति को सहने की क्षमता होती है…!

भारत का रेडियोएक्टिविटी मैप उठा ले हैरान हो जायेंगे भारत सरकार के न्युक्लियर रियेक्टर के अलावा सभी ज्योतिर्लिंगो के स्थानों पर सबसे ज्यादा रेडियेशन पाया जाता है !

शिवलिंग ओर कुछ नहीं बल्कि न्युक्लियर रिएक्टर्स ही तो है तभी तो उस पर जल चढाया जाता है ताकि वो शांत रहे, महादेव के सभी प्रिय पदार्थ जैसे कि “बिल्वपत्र, आक, धतूरा, गुड़हल, आदि सभी न्युक्लियर एनर्जी सोखने वाले हैं
शिवलिंग पर चढा पानी भी रिएक्टिव हो जाता है इसलिए तो जल निकासी नलिका को लाँघा नही जाता…
भाभा एटाॅमिक रिएक्टर का डिजाइन भी शिवलिंग की तरह ही है, शिवलिंग पर चढाया जल नदी के बहते जल के साथ मिलकर औषधि का रूप ले लेता है, तभी तो हमारे पूर्वज हम लोगों से कहते थे कि “महादेव शिवशंकर” अगर नाराज हो जायेंगे तो प्रलय आ जायेगी…ध्यान दें कि हमारी परम्पराओं के पीछे कितना गहन विज्ञान छिपा हुआ है !
जिस संस्कृति की कोख से हमनें जनम लिया वो तो चिर सनातन है ! विज्ञान को परम्पराओं का जामा इसलिए पहनाया गया ताकि वो प्रचलन बन जाए और हम भारतवासी सदा वैज्ञानिक जीवन जीते रहे…
आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि भारत में ऐसे महत्वपूर्ण शिव मंदिर है जो “केदारनाथ” से लेकर “रामेश्वरम” तक एक ही सीधी रेखा में बनाये गए हैं , आश्चर्य है कि हमारे पूर्वजो के पास ऐसा कैसा विज्ञान और तकनीक थी जिसे हम आज तक नहीं समझ पाये ? उत्तराखंड का “श्री केदारनाथ” तेलंगाना का “कालेश्वरम” आंध्रप्रदेश का “कालहस्ती” तमिलनाडु का “एकंबरेश्वर” चिदंबरम और अंततः “रामेश्वरम” मंदिरो को 79°E 41’54” Longitud की भोगोलिक सीधी रेखा में बनाया गया है !
यह सारे मंदिर प्रकृति के 5 तत्वों में लिंग की अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसे हम आम भाषा में पंचभूत कहते हैं, पंचभूत यानि पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, और अंतरिक्ष, इन्हीं पाँच तत्वों के आधार पर इन पाँच शिवलिगों को प्रतिष्ठापित किया गया है !
जल का प्रतिनिधित्व तिरूवनैकवल मंदिर में है ,आग का प्रतिनिधित्व तिरूवन्नमलई में है , हवा का प्रतिनिधित्व कालाहस्ती में है, पृथ्वी का प्रतिनिधित्व कांचीपुरम में है, और अंत में अंतरिक्ष का प्रतिनिधित्व चिदंबरम मंदिर में है, वास्तु -विज्ञान – वेद के अदभुत समागम को दर्शाते हैं ये पाँच मंदिर…!!

भौगोलिक रूप से भी इन मंदिरो में विशेषता पाई जाती है, इन पाँच मंदिरो को योग विज्ञान के अनुसार बनाया गया था और एक दूसरे के साथ एक निश्चित भौगोलिक संरेखण में रखा गया है, इस के पीछे निश्चित ही कोई विज्ञान होगा जो मनुष्य के शरीर पर प्रभाव करता होगा !
इन मंदिरो का करीब पाँच हजार वर्ष पूर्व निर्माण किया गया था जब उन स्थानों के अक्षांश और देशांतर को मापने के लिए कोई उपग्रह तकनीक उपलब्ध ही नहीं था तो फिर कैसे इतने सटीक रूप से पाँच मंदिरो को प्रतिष्ठापित किया गया था ? उत्तर भगवान ही जाने …!

केदारनाथ और रामेश्वरम के बीच 2383 किमी की दूरी है लेकिन ये सारे मंदिर लगभग एक ही समानांतर रेखा में पडते हैं ! आखिर हजारों वर्ष पूर्व किस तकनीक का उपयोग कर इन मंदिरो को समानांतर रेखा में बनाया गया है यह आज तक रहस्य ही है . श्रीकालहस्ती मंदिर में टिमटिमाते दीपक से पता चलता है वह “वायु लिंग” है तिरूवन्निका मंदिर के अंदरुनी पठार में जल बसंत से पता चलता है कि यह “जल लिंग” है . अन्नामलाई पहाडी पर विशाल दीपक से पता चलता है कि वह “अग्नि लिंग” है . कांचीपुरम के रेत के स्वयंभू लिंग से पता चलता है कि वह “पृथ्वी लिंग” है . और चिदंबरम की निराकार अवस्था से भगवान की निराकारता यानि “आकाश तत्व” का पता चलता है !
अब यह आश्चर्य की बात नहीं तो और क्या है कि ब्रह्मांड के पाँच तत्वों का प्रतिनिधित्व करने वाले पाँच लिगों को एक समान रेखा में सदियों पूर्व ही प्रतिष्ठापित किया गया है ! हमें हमारे पूर्वजो के ज्ञान और बुद्धिमत्ता पर गर्व होना चाहिए कि उनके पास ऐसी विज्ञान और तकनीक थी जिसे आधुनिक विज्ञान भी नहीं भेद पाया है, माना जाता है कि केवल यह पाँच मंदिर ही नहीं अपितु इसी रेखा में अनेक मंदिर होंगे जो “केदारनाथ” से “रामेश्वरम” तक सीधी रेखा में पडते हैं, इस रेखा को “शिवशक्ति अक्श रेखा” भी कहा जाता है ! संभवतया यह सारे मंदिर “कैलाश” को ध्यान में रखते हुए बनाये गये हो जो 81.3119° E में पडता है !? उत्तर शिवजी ही जाने…!

कमाल की बात “महाकाल” से “शिव ज्योतिर्लिंगों के बीच कैसा संबंध है……??

🔱 उज्जैन से शेष ज्योतिर्लिगों की दूरी भी है रोचक
👇👇👇

उज्जैन से सोमनाथ – 777 किमी
उज्जैन से ओंकारेश्वर – 111 किमी
उज्जैन से भीमाशंकर – 666 किमी
उज्जैन से काशी विश्वनाथ – 999 किमी
उज्जैन से मल्लिकार्जुन – 999 किमी
उज्जैन से केदारनाथ – 888 किमी
उज्जैन से त्रयंबकेश्वर – 555 किमी
उज्जैन से बैजनाथ – 999 किमी
उज्जैन से रामेश्वरम – 1999 किमी
उज्जैन से घृष्णेश्वर -555 किमी

हिंदू धर्म में बिना कारण के कुछ भी नहीं होता था ! उज्जैन पृथ्वी का केंद्र माना जाता है जो सनातन धर्म में हजारों सालों से मानते आ रहे हैं इसलिए उज्जैन में सूर्य की गणना के लिए मानव निर्मित यंत्र भी बनाये गये हैं करीब 2050 वर्ष पहले और जब करीब 100 साल पहले पृथ्वी पर काल्पनिक रेखा ( कर्क) अंग्रेज वैज्ञानिक द्वारा बनायी गई तो उनका मध्य भाग उज्जैन ही निकला. आज भी वैज्ञानिक उज्जैन ही आते हैं सूर्य और अंतरिक्ष की जानकारी के लिए……!!

Post Views: 221
  • Facebook
  • Twitter
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Facebook Messenger
  • Copy Link
Tags: jyotilingmahakalshivlingujjain mahakal temple
ShareTweetPin
Previous Post

23 aug 2025

Next Post

24 aug 2025

Related Posts

गैंगस्टरों ते वार का 173वां दिन: पंजाब पुलिस की 1074 स्थानों पर छापेमारी; 911 काबू
BREAKING

विजिलेंस ब्यूरो ने सहायक उप-निरीक्षक तथा एसएचओ के रीडर को 1,00,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ काबू किया

0
ऋषि प्रसाद सेवाधारी सम्मानित
INDIA

ऋषि प्रसाद सेवाधारी सम्मानित

0
पंजाब शिक्षा क्रांति: रिकॉर्ड NEET, JEE नतीजों के लिए भगवंत मान सरकार ने 300 से अधिक प्रिंसिपलों को सम्मानित किया
BREAKING

भगवंत मान सरकार द्वारा अमृतसर में बेहतर स्वच्छता सेवाएँ सुनिश्चित करने के लिए 60 एम.एल.डी. सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को मंज़ूरी, जल्द शुरू होगा काम

0
कल का पंचांग
BREAKING

कल का पंचांग

0
श्रीलंका टेस्ट सीरीज से पहले केएल राहुल ने गीली/सीली पिच पर स्पिन का सामना करने का अभ्यास क्यों किया?
BREAKING

श्रीलंका टेस्ट सीरीज से पहले केएल राहुल ने गीली/सीली पिच पर स्पिन का सामना करने का अभ्यास क्यों किया?

0
गीतकार और संवाद लेखक मनोज मुंतशिर ने फिल्म ‘आदिपुरुष’ को एक ‘असफल प्रयास’ (Failed Attempt) स्वीकार करते हुए कहा है कि इसकी तुलना नितेश तिवारी की आगामी फिल्म ‘रामायण’ से नहीं की जानी चाहिए।
BREAKING

गीतकार और संवाद लेखक मनोज मुंतशिर ने फिल्म ‘आदिपुरुष’ को एक ‘असफल प्रयास’ (Failed Attempt) स्वीकार करते हुए कहा है कि इसकी तुलना नितेश तिवारी की आगामी फिल्म ‘रामायण’ से नहीं की जानी चाहिए।

0
Next Post

24 aug 2025

Press Ki Taquat

© 2023 presskitaquat.com - Powered by AMBIT SOLUTIONS+917488039982

Navigate Site

  • HOME
  • BREAKING
  • PUNJAB
  • HARYANA
  • INDIA
  • WORLD
  • SPORTS
  • ENTERTAINMENT
  • CAREER
  • EDUCATION
  • DHARAM
  • E-Paper
  • CONTACT US

Follow Us

No Result
View All Result
  • HOME
  • BREAKING
  • PUNJAB
  • HARYANA
  • INDIA
  • WORLD
  • SPORTS
  • ENTERTAINMENT
  • CAREER
  • EDUCATION
  • DHARAM
  • E-Paper
  • CONTACT US

© 2023 presskitaquat.com - Powered by AMBIT SOLUTIONS+917488039982