छिंदवाड़ा(सुशील सिंह परिहार)- समाजिक कार्यकर्ता एव राष्ट्रीय तेली पिछड़ा वैश्य महासभा ट्र्स्ट के जिलाध्यक्ष भगवान दिन साहू के नेतृत्व में बहुत से धार्मिक एव सामाजिक संगठनों ने जिले के लोकप्रिय सांसद विवेक ( बंटी ) साहू एव जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति जी ,प्रधानमंत्री जी और मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय जबलपुर के नाम ज्ञापन देकर 14 गौ रक्षको के न्याय की मांग की ज्ञापन में बताया कि हाल ही में नर्मदापुरम (म.प्र.) की एक आदलत ने 14 गौ रक्षकों को उम्र कैद की सजा सुनाई है । इस न्यायिक फैसले का पूरे देश में विरोध हो रहा है । फैसला सुनाने वाली जज साहिबा धर्म विशेष से तालुक रखती हैं । सोशल मीडिया पर जज साहिबा की कार्यप्रणाली पर लोग तरह तरह की टिप्पणी कर रहे हैं। जिससे न्यायपालिका की छवि धूमिल हो रही हैं । उक्त घटना 3 अगस्त 2022 की है । जिसमें अमरावती के रहने वाले गौ- तस्कर नजीर अहमद के साथ मारपीट हुई थी जिसकी कुछ दिनों बाद अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हुई ।मेडिकल रिपोर्ट में बताया गया कि गौ तस्कर की मौत श्वसन नली में भोजन अटकने से हुई है , पोस्टमार्टम रिपोर्ट में है। उक्त घटना का कोई साक्ष्य भी नही है ।14 गौरक्षक के सैकड़ों परिवार जनों को मानसिक प्रताडना एव त्रास देने के उद्देश्य से उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई गई । पूरे देश में इस सजा का जमकर विरोध हो रहा है । एक ऐसा ही मामला इन दिनों सोशल मीडिया की सुर्खी बना है जिसमें जोधपुर उच्च न्यायालय ने संत श्री आशाराम जी बापू को उम्र कैद की सजा सुनाई । सन 2013 में एक लड़की ने उन पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया था । लड़की का मेडिकल परीक्षण रिपोर्ट नील आई , 4 सह आरोपियों को बरी किया गया । जोधपुर पुलिस ने गैंग रेप की धारा लगाई थी, उसे कोर्ट ने हटा दिया । आशाराम जी बापू के खिलाफ ना कोई गवाह है ना सबूत है फिर भी 89 वर्ष की आयु में उन्हें उम्र कैद की सजा देना न्याय व्यवस्था का मजाक बना हुआ है । जबकि तथाकथित घटना के वक्त पूज्य बापू जी वहां थे ही नहीं । तथाकथित घटना के समय लड़की उसके पुरुष मित्र के साथ 90 मिनिट मोबाइल में व्यस्त थी ।कॉल डिटेल न्यायालय में प्रस्तुत की गई है। इस फैसले की भी विश्व भर में निंदा हो रही है । दोनों न्यायालय के आदेश सोशल मीडिया की सुर्खी बने हैं । दुर्भाग्य से दोनों जगह राजस्थान और मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार है । दोनों आदेश में एक बात की सामानता है – नर्मदापुरम कोर्ट की जज साहिबा धर्म विशेष से आती हैं और जोधपुर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का धर्मांतरण वालों से साठगांठ है । गौ रक्षक गौ माता की सेवा करने का परिणाम भुगत रहें हैं और सन्त आशाराम जी बापू सनातन संस्कृति की रक्षा करने का तथा लाखों लोगों को धर्मांतरण से बचाने का दंड भुगत रहे हैं।इन दोनों प्रकरणों के आदेशों से यह सन्देस देने का प्रयास किया गया है कि भविष्य में जो भी गो रक्षा के लिए लड़ेगा एवं जो धर्मांतरण का विरोध करेगा उसकी यही दुर्दशा होगी । दोनों आदेश 100 करोड़ हिंदुओ के मुंह पर तमाचा है ।इन प्रकरणों में उचित न्याय समय की मांग है ।ज्ञापन देते समय आधुनिक चिंतक हरशूल रघुवंशी ,राष्ट्रीय बजरंग दल के नितेश साहू श्री योग वेदांत सेवा समिति के अध्यक्ष मदन मोहन परसाई ,अशोक साहू ( राष्ट्रपति पुरुस्कार से सम्मानित ) ,कुन्बी समाज के मार्गदर्शक सुभाष इंगले , कलार समाज के बबलू सूरज प्रसाद माहोरे ,साहू समाज के ओमी साहू ,कुन्बी समाज के युवा नेता अंकित ठाकरे ,पावर समाज के हेमराज पटले , राष्ट्रीय बौद्ध महासभा के विनोद भगत ,आई टी शेल के प्रभारी भूपेश पहाड़े ,नमो नमो मोर्चा के जिलाध्यक्ष नितिन साहू ,अश्विन पटेल ,रामेश्वर कर्मवीर ,ओमप्रकाश डहेरिया ,गौरीशंकर धारे ,पशू प्रेमी अक्षत परसाई ,विमल शेरके ,डॉ मीरा पराडकर ,करुणेश पाल ,शकुंतला कराडे ,छाया परसाई ,छाया साहू ,रुपाली इंगले ,सुधा ताम्रकार ,वर्षा आहूजा ,योगिता पराडकर आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे ।



