कोलकाता (Press Ki Taquat Bureau) : भाजपा सरकार ने तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी सरकार के पिछले बजट की तुलना में अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा के बजट में 60 प्रतिशत से अधिक की भारी कटौती कर दी है। बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा सरकार के पहले पूर्ण बजट ने राज्य की राजनीतिक और वित्तीय प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव दर्ज कराया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सरकार के पिछले बजट में जहां अल्पसंख्यक कल्याण और मदरसा शिक्षा प्रमुख एजेंडा थे, वहीं मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सरकार के पहले पूर्ण बजट में महिलाओं, रोजगार, औद्योगिक विकास और आधारभूत ढांचे को सबसे अधिक महत्व दिया गया है।
ममता बनर्जी सरकार ने फरवरी 2026 में जो अंतरिम बजट पेश किया था, उसमें अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के लिए रिकार्ड 5,713.61 करोड़ आवंटित किए थे। उस समय भाजपा ने इन प्रावधानों को तुष्टीकरण की राजनीति का हिस्सा बताते हुए तीखी आलोचना की थी।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने आज अपने पहले ही बजट में टीएमसी की प्राथमिकताओं को उलट कर रख दिया। जय श्रीराम के नारों के बीच पेश हुए इस बजट में अल्पसंख्यक कल्याण और मदरसा शिक्षा के बजट को घटाकर मात्र 2,165 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
भाजपा सरकार के पहले पूर्ण बजट में किसी समुदाय विशेष के लिए नई बड़ी योजना की घोषणा नहीं की गई। बजट का सबसे बड़ा फोकस महिलाओं के लिए 36 हजार करोड़ रुपये की अन्नपूर्णा योजना, सरकारी कर्मचारियों के लिए 20 प्रतिशत महंगाई भत्ता, रोजगार सृजन, औद्योगिक निवेश, आधारभूत ढांचे के विस्तार तथा उत्तर बंगाल में आइआइटी और आइआइएम जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना पर रहा।
अल्पसंख्यकों के लिए अलग से किसी नई योजना या विशेष पैकेज का उल्लेख बजट भाषण में प्रमुखता से नहीं किया गया।
विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने विपक्ष में रहते हुए तृणमूल सरकार पर जिस ‘तुष्टीकरण की राजनीति’ का आरोप लगाया था, सत्ता में आने के बाद उसके पहले पूर्ण बजट में उसी नीति से स्पष्ट दूरी बनाने की कोशिश दिखाई देती है। ऐसे में दोनों सरकारों के बजट की तुलना यह संकेत देती है कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ बजट की राजनीति का स्वरूप भी बदल गया है।











