इटावा(डा. पुष्पेंद सिंह चौहान)- पूज्य संत श्री आशारामजी बापू की पावन प्रेरणा से श्री योग वेदांत सेवा समिति के द्वारा आयोजित हुआ भव्य कार्यक्रम।गुरुपूनम श्रद्धालुओं और गुरुभक्तों के लिए एक हर्ष का विषय है। आज२९ जुलाई को व्यास पूर्णिमा के पावन अवसर पर एक विशाल आध्यात्मिक एवं सेवाभावी कार्यक्रम का आयोजन हुआ है। यह संपूर्ण कार्यक्रम परम पूज्य संत श्री आशारामजी बापू की पावन प्रेरणा एवं श्री योग वेदांत सेवा समिति के विशेष सहयोग से संपन्न हुआ है।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण एवं गतिविधियाँ:
पादुका यात्रा, पादुका पूजन व पादुका आरती
गुरुदेव की श्री पादुका की सम्मान के साथ पूरे आश्रम में संकीर्तन यात्रा निकाली गई। व्यासपीठ पर पहुंचते ही मंत्रों उच्चारण के साथ पादुका पूजन हुआ, एवं आरती की गई।मानसिक पूजन आज गुरुपूनम निम्मित सभी ने गुरुदेव का मानसिक पूजन किया गुरुपूजन खासकर गुरु पूर्णिमा के दिन या रोजाना साधना में किया जाता है। इसका उद्देश्य गुरु के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करना है।गुरु पूजन में भाव सबसे ज्यादा जरूरी है साथ में पवित्रता और सेवा भाव।
गुरु पूजन में प्रथम संकल्प के साथ गुरु आवाहन, पंचोपचार पूजन, गुरु स्तुति, आशारामायण पाठ, गुरु महिमा के भजन, एवं गुरु मंत्र का जाप होता है। आरती, हाथ जोड़कर प्रार्थना और क्षमा अंत में होती है।
“सेवा से, सुमिरन से, सत्संग से जो गुरु को रिझाता है, वही सच्चा गुरुपूजन करता है”
श्री आशारामायण जी का पाठ एवं सत्संग श्रवण: श्री आशारामायण जी का पाठ हुआ साथ ही व्यास पूर्णिमा के इस दिव्य अवसर पर पूज्य बापूजी के अमृतमयी एवं ओजस्वी सत्संग वचनों का सामूहिक श्रवण किया गया श्री आशारामायण पाठ पूज्य संत श्री आशारामजी बापू के जीवन चरित्र पर आधारित एक पद्य रूप की स्तुति पाठ है। इसे “योगलीला संक्षेप” भी कहा जाता है। यह पाठ पूज्य बापूजी के जीवन और उपदेशों पर आधारित है। श्रद्धा और समर्पण के साथ किया गया पाठ ही फलदायी माना जाता है।लौकिक और आध्यात्मिक लाभ के साथ साथ ही भक्ति रस, ज्ञान रस और कर्मयोग की प्रेरणा मिलती है।
108 पाठ करने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।
भजन संकीर्तन: स्थानीय एवं आमंत्रित साधकों द्वारा सुमधुर श्री गुरु-महिमा भजनों की प्रस्तुतियां दी गई।
विशाल भंडारा (महाप्रसाद): आश्रम में आने वाले सभी श्रद्धालुओं और आम जनता के लिए एक वृहद भंडारे का आयोजन किया गया, जो प्रभु इच्छा तक निरंतर जारी रहा।
श्री योग वेदांत सेवा समिति और स्थानीय आश्रम परिवार ने क्षेत्र के सभी प्रबुद्ध नागरिकों और धर्मप्रेमियों से भाव भरी अपील की थी कि इस अमूल्य और अलौकिक अवसर को चूके नहीं। साधकों ने सपरिवार और मित्रों सहित आश्रम पधारकर सत्संग, भंडारे और सेवा कार्यों का पुण्य लाभ उठाया।











