छिंदवाड़ा(सुशील सिंह परिहार)- आज संत श्री आशाराम जी गुरुकुल छिंदवाड़ा मे संस्कृत दिवस व रक्षाबंधन का पर्व धूमधाम से मनाया गया। अतिथिओं ने अपने सम्बोधन मे बताया कि संस्कार जिससे मिलते हैं वह है वैदिक भाषा, संस्कृत भाषा । इसको ‘देवभाषा’ भी कहा गया है । यह विश्व की सबसे समृद्ध भाषा कही गयी है । धार्मिक जीवन, सुसंस्कृत जीवन, भोग की विकृति से बचकर समाधिस्थ और प्रकृतिस्थ जीवन इन सबसे ऊपर उठाकर प्रारब्ध से भी आगे पहुँचा के जीवात्मा को परमात्मा से मिलाने की व्यवस्था करती है संस्कृत भाषा व अपनी संस्कृति है ।
देशभर के 24 से अधिक राज्यों के पढ़ने वाले विद्यार्थियों द्वारा आज गुरुकुल छात्रावास में बड़ी भव्यता से दोनो कार्यक्रम संपन्न हुए। इस अवसर पर देशभर से दूर-दराज से आए बच्चों के अभिभावक भी सम्मिलित हुए यह कार्यक्रम बहुत ही भाव विभोर करने वाला था। रक्षाबंधन भाई बहन को एक दूसरे के प्रति स्नेह व प्रेम के बंधन को प्रकट करने वाला पर्व है। रक्षा सूत्र बांधकर सभी बहनों ने भाइयों के मंगलमय जीवन की कामना की और उन्हें मिठाई खिलाकर मुंह मीठा कराया तथा भाइयों ने भी बहनों की रक्षा का संकल्प लिया इस कार्यक्रम में गुरुकुल छात्रावास एवं अनेकों संगठनों के अनेकों लोग उपस्थित रहे । कार्यक्रम में गुरुकुल की संचालिका श्रीमती दर्शना खट्टर, आयुर्वेदाचार्य डॉक्टर पवन नेमा, सुशील सिंह परिहार, छात्रावास अधीक्षक श्री सोमनाथ पवार सहित छात्रावास एवं विद्यालय के अनेकों शिक्षक उपस्थित रहे। अंत में गुरुकुल परिवार की ओर से सभी का हार्दिक आभार व्यक्त किया गया












